प्रियंका गांधी

रिपोर्ट | राजनीति

प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाने का फैसला क्यों लिया गया?

प्रियंका गांधी के सिसायत में आने को लेकर कई सालों से अटकलें लगाई जाती रही हैं. लेकिन जब सच में इसका ऐलान हुआ तो यह बड़ा ठंडा था

ब्यूरो | 24 जनवरी 2019 | फोटो : कांग्रेस / फेसबुक

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सियासत में प्रियंका गांधी का अनौपचारिक प्रवेश राहुल गांधी से पहले हुआ था. लेकिन इसे औपचारिक होने में 20 साल लग गये. बुधवार को जब कांग्रेस ने उन्हें महासचिव बनाने का ऐलान किया तो बड़े-बड़े कांग्रेसी नेता भी चौंक गए. मीडिया ने जब अचानक फोन कर उनसे उनकी प्रतिक्रिया पूछी तो ज्यादातर लोगों के पास इस पर कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं था.

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प्रियंका गांधी के सिसायत में आने को लेकर कई सालों से अटकलें लगाई जाती रही हैं. लेकिन जब सच में इसका ऐलान हुआ तो यह बड़ा ठंडा था. उस वक्त राहुल गांधी अमेठी में थे, और उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया के बराबर खड़ा करते हुए बता रहे थे कि उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी इन दोनों को दी गई है.

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पिछले करीब छह महीने से वे पर्दे के पीछे से पार्टी में सक्रिय थीं और उसके ज्यादातर महत्वपूर्ण फैसले ले रही थीं. प्रियंका के साथ काम करने वाली टीम के एक सदस्य बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में जब अखिलेश और मायावती ने हाथ मिला लिया तो राहुल और प्रियंका के बीच इस पर एक लंबी बैठक हुई. प्रियंका सिर्फ चंद सीटें लेकर महागठबंधन में शामिल होने के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन राहुल का अकेले ही उत्तर प्रदेश जीत लेना भी दिन में सपने देखने जैसा ही था. ऐसे में उन्होंने सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला कर लिया और अपने लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश का चुनावी मैदान भी चुन लिया.

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कांग्रेस के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश किसी बंजर ज़मीन जैसा ही है. ऊपर से योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से हैं और काशी से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव में उतरेंगे. इसे देखते हुए कांग्रेस वॉर रूम में इस वक्त 2014 और 2009 के चुनावों का अध्ययन चल रहा है. कांग्रेस ने 2009 में उत्तर प्रदेश की 21 लोकसभा सीटें जीती थीं और भाजपा ने 2014 में 71. बताया जाता है कि इन दोनों चुनावों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद कांग्रेस की अंतिम रणनीति बनाई जाएगी.

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फिलहाल जो तय है वो यह कि प्रियंका गांधी अब अपना पूरा वक्त उत्तर प्रदेश में ही लगाएंगी. वे जैसे अमेठी और रायबरेली में प्रचार करती थीं उसी अंदाज़ में पूर्वी उत्तर प्रदेश में छोटी-छोटी सभाएं करेंगी, घर-घर जाकर महिलाओं से मिलेंगी और पुराने कांग्रेसियों को उनके घरों से बाहर निकालेंगी. उनके आने से कांग्रेस में उत्साह का संचार होना भी तय है. जैसा कि कांग्रेस के एक नेता कहते हैं वे चुनाव से सिर्फ 90 दिन पहले आई हैं, लेकिन प्रियंका आ गईं. यही काफी है.

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