पश्चिम बंगाल

रिपोर्ट | राजनीति

पश्चिम बंगाल में चुनावी लड़ाई मुद्दों से ज्यादा जनसभाओं पर हो रही है

जनसभाओं को लेकर विरोधी पार्टियों के बीच इस तरह का संघर्ष भारतीय राजनीति के हालिया इतिहास में देखने को नहीं मिलता है

ब्यूरो | 08 फरवरी 2019 | फोटो : हेमन्त कुमार

1

बीती तीन फरवरी की बात है. पश्चिम बंगाल में भाजपा की ओर से लोकतंत्र बचाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा होनी थीं. इसके लिए पार्टी ने पूरी तैयारी कर रखी थी. लेकिन स्थानीय प्रशासन ने उनके हेलिकॉप्टर को जमीन पर उतरने की अनुमति नहीं दी. इस वजह से उन्हें फोन के जरिए बालुरघाट में लोगों को संबोधित करना पड़ा. इसके अगले दिन योगी आदित्यनाथ ने सड़क मार्ग से बंगाल पहुंचकर एक जनसभा को संबोधित किया.

2

बीते महीने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मालदा से भाजपा के चुनावी अभियान की शुरूआत की थी. तब उनके हैलिकॉप्टर को भी जमीन पर उतरने की इजाजत नहीं दी गई थी. इसके बाद से योगी आदित्यनाथ के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह यहां जनसभाएं कर चुके हैं. और इनसे जुड़े कई विवाद भी सामने आ चुके हैं.

3

अगर शुक्रवार कीे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा की बात करें तो इसके खिलाफ भी छह किसानों ने प्राथमिकी दर्ज कराई हैे. इनका कहना है कि जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से उनकी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है. हालांकि भाजपा का कहना है कि ये सभी टीएससी के कार्यकर्ता हैं. इससे पहले नरेंद्र मोदी की सभा को रोकने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने जनसभा स्थल पर क्रिकेट टूर्नामेंट कराने की बात भी कही थी.

4

बीते हफ्ते राजनाथ सिंह की जनसभा को लेकर भी ऐसा ही विवाद हुआ था. उन्हें दो फरवरी को कूचबिहार के माथाभंगा में एक जनसभा करनी थी. लेकिन, प्रशासन ने इसके लिए मैदान उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया. इसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जनसभा के लिए अपनी खेती की जमीन उपलब्ध कराई थी. उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दुर्गापुर में एक रैली करनी थी. इसे भी खेती की जमीन पर ही आयोजित किया गया था. भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए इसके लिए आस-पास के जंगलों को भी साफ करना पड़ा था.

5

जनसभाओं को लेकर पार्टियों के बीच इस तरह का संघर्ष हालिया इतिहास में देखने को नहीं मिला है. जानकारों के मुताबिक आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं क्योंकि अगर ममता बनर्जी की सरकार प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के साथ ऐसा कर सकती है तो बाकी के नेताओं के मामले में वो किसी भी हद तक जा सकती है. ऐसा भी माना ही जाता है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को राजनीति में हर तरह के दांव-पेंच आजमाने से कोई गुरेज नहीं है.ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि पश्चिम बंगाल में अगले आम चुनाव का रंग बाकी राज्यों से काफी अलग देखने को मिलने वाला है.

  • विरल आचार्य, आरबीआई डिप्टी गवर्नर

    विचार | अर्थव्यवस्था

    विरल आचार्य के इस्तीफे से आरबीआई की साख पर क्या असर पड़ने वाला है?

    ब्यूरो | 2 मिनट पहले

    डोनाल्ड ट्रंप

    समाचार | बुलेटिन

    अमेरिका द्वारा ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जाने सहित आज के बड़े समाचार

    ब्यूरो | 52 मिनट पहले

    द हिंदू अखबार में आपातकाल की खबर

    समाचार | आज का कल

    देश में आपातकाल की घोषणा सहित 25 जून को घटी पांच प्रमुख घटनाएं

    ब्यूरो | 4 घंटे पहले

    भाजपा पश्चिम बंगाल

    समाचार | अख़बार

    पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की टूट जारी रहने सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

    ब्यूरो | 10 घंटे पहले