विराट कोहली

रिपोर्ट | खेल

इकलौती मुश्किल जो आज भारत को ऑस्ट्रेलिया में इतिहास रचने से रोक सकती है

भारत ने अब तक ऑस्ट्रेलिया में कोई द्विपक्षीय वनडे सीरीज नहीं जीती है

ब्यूरो | 18 जनवरी 2019 | फोटो : बीसीसीआई / ट्विटर

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ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाने से पहले भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री और विराट कोहली का कहना था कि उनका ध्यान केवल मैच जीतने पर होगा, इतिहास रचने पर नहीं. लेकिन, भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. विराट कोहली और उनकी टीम के पास आज भी इतिहास बनाने का मौका है. अगर भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाले तीसरे और आखिरी एकदिवसीय मैच को भी जीत लेता है तो यह भी एक रिकॉर्ड ही होगा.

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ऐसा नहीं है कि भारत ने ऑस्ट्रेलिया में वनडे सीरीज नहीं जीती हैं. लेकिन इनमें से कोई भी द्विपक्षीय नहीं थी. 1985 में उसने यहां विश्व चैंपियनशिप जीती थी और उसके बाद 2008 में हुई तीन देशों की सीरीज में भी भारत ने जीत हासिल की थी.

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आज होने वाले फाइनल मैच में गेंदबाजी भारत की सबसे बड़ी चिंता है. दरअसल, ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर उसे तीसरे तेज गेंदबाज की कमी काफी ज्यादा खल रही है. सीरीज के पहले मैच में भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी के साथ खलील अहमद को तीसरे पेसर के रूप में जगह दी गई थी. लेकिन, वे काफी महंगे साबित हुए. इसके बाद दूसरे मैच में खलील की जगह मोहम्मद सिराज को मौका दिया गया लेकिन उन्होंने भी अपने दस ओवर में 76 रन दे डाले. हार्दिक पांड्या के विवादों में फंसने के बाद उनकी जगह टीम में हरफनमौला विजय शंकर को शामिल किया गया है. लेकिन, सीरीज के इस सबसे महत्वपूर्ण मैच से उन्हें खिलाया जाएगा, इसकी उम्मीद थोड़ी कम है.

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अगर टीम में कोई पार्ट टाइम गेंदबाज ऐसा हो जो शंकर के असफल होने पर कुछ ओवर कर सके तो उन्हें मौका दिया जा सकता है. पिछले मैच में अंबाती रायडू को उनके एक्शन की वजह से गेंदबाजी करने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है. ऐसे में पार्ट टाइम गेंदबाज के तौर पर भारत के पास सिर्फ केदार जाधव बचते हैं. लेकिन, जाधव को टीम में किसकी जगह लाया जाए यह एक और बड़ा सवाल है.

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गेंदबाज के तौर पर कोहली के पास स्पिन गेंदबाज युजवेंद्र चहल का भी विकल्प है. उन्होंने विदेशी धरती पर भारत को कई श्रंखलाएं जितवायीं हैं. लेकिन उन्हें शामिल करने पर टीम में तीन स्पिनर हो जाएंगे जिसका फायदा ऑस्ट्रेलिया उठा सकता है.

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