रिपोर्ट | सेना

बरेली में भारतीय सेना के सात ‘पराक्रमी’ घोड़ों की मौत से जुड़े पांच तथ्य

दुनिया की सबसे अच्छी नस्लों के इन घोड़ों को बरेली छावनी में आला दर्जे का प्रशिक्षण दिया जाता है

ब्यूरो | 11 दिसंबर 2018

1

बरेली छावनी में सात घोड़ों की मौत और चालीस घोड़ों के बीमार होने से सेना और उससे जुड़े विभागों में खलबली मच गई है. बरेली छावनी में सेना की एक बड़ी घुड़साल है जिसे घोड़ा बटालियन भी कहा जाता है. इस घुड़साल में अच्छी-खासी संख्या में काफी बढ़िया नस्ल के घोड़े मौजूद हैं. इन घोड़ों को दुर्गम परिस्थितियों में सिपाहियों की सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है.

2

खबरों के अनुसार इन घोड़ों की मौत तथा तबियत बिगड़ने का कारण ध्वनि प्रदूषण है. बरेली के कैंट इलाके में केवल सेना के लोग और उनके परिवार ही नहीं बल्कि आम लोग भी रहते हैं. अधिकारियों का मानना है कि इसके चलते इलाके में भारी यातायात रहता और उसकी वजह से ध्वनि प्रदूषण भी रहता है. इसके चलते घोड़े काफी तनाव में रहते हैं. वे न कुछ खाते हैं और न ही ठीक से सोते हैं. ऐसे में उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा है और वे चिड़चिड़े होते जा रहे हैं.

3

ध्वनि प्रदूषण से घोड़ों की मौत की बात इसलिए भी ठीक लगती है क्योंकि घोड़ों की सुनने की क्षमता इंसानों से कहीं बेहतर होती है. एक आम इंसान जहां 20 हर्ट्ज़ से लेकर 20 किलोहर्ट्ज़ तक की ध्वनि को ही सुन सकता है, वहीं घोड़े न्यूनतम 14 हर्ट्ज़ से लेकर 25 किलोहर्ट्ज़ तक की ध्वनि सुन सकते हैं. अपनी इसी खूबी के चलते घोड़े भूकंप की आहट पहले ही महसूस कर लेते हैं. ऐसे में घोड़ों का शोर के प्रति अधिक संवेदनशील होना एक सामान्य सी बात है.

4

अपनी तरह के इस अनोखे मामले के सार्वजनिक हो जाने से रक्षा मंत्रालय तक के कान खड़े हो गए हैं. उसने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. इस बारे में छावनी इलाके के प्रशासनिक कमांडेंट कर्नल पी अमित बताते हैं कि, ‘चिकित्सकों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि घोड़ों की मौत ध्वनि प्रदूषण से ही हुई है. उन्होंने सिर्फ इसे संभावित कारण बताया है. उनकी मौत के कारणों में लोगों की अधिक आवाज़ाही की वज़ह से हुआ कोई संक्रमण भी हो सकता है. हालांकि इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है.’

5

इस मामले में छावनी में रह रहे आम नागरिकों का कहना है कि केवल अंदेशे के आधार पर वाहनों और यातायात को घोड़ों की मौत का दोषी ठहरा देना सही नहीं है. वे यह भी सवाल उठाते हैं कि कहीं यह छावनी इलाके को आम जनता की जद से बाहर करने के लिए सेना द्वारा रचा गया कोई प्रपंच तो नहीं है! इस अंदाजे को उन खबरों से भी हवा मिलती है जिनमें कहा गया है कि सेना अपनी सभी छावनियों को पूरी तरह सैन्य इलाकों में तब्दील करने की तैयारी कर रही है.

सत्याग्रह की रिपोर्ट पर आधारित

  • मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा

    समाचार | अख़बार

    6 मार्च के बाद आम चुनाव की तारीखों के ऐलान सहित आज के अखबारों की पांच बड़ी खबरें

    ब्यूरो | 8 घंटे पहले

    अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि

    समाचार | बुलेटिन

    अयोध्या विवाद पर 26 फरवरी को सुनवाई होने सहित आज के पांच बड़े समाचार

    ब्यूरो | 21 घंटे पहले

    मिजोरम, लोक उत्सव

    समाचार | आज का कल

    मिज़ोरम राज्य के अस्तित्व में आने सहित 20 फरवरी को घटी पांच प्रमुख घटनाएं

    ब्यूरो | 20 फरवरी 2019