प्रशांत कनोजिया

विचार | सोशल मीडिया

पुलिस तो सवालों के घेरे में है ही लेकिन सवाल प्रशांत कनौजिया के व्यवहार पर भी कम नहीं हैं

प्रशांत कनोजिया के मामले को पत्रकारों और ट्रोलर्स के बीच कम होते अंतर की तरह भी देखा जा रहा है

ब्यूरो | 11 मई 2019 | फोटो: फेसबुक-प्रशांत कनोजिया

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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रशांत कनोजिया को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है. पुलिस ने प्रशांत कनौजिया को शनिवार को दिल्ली से गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ एक पुलिसकर्मी ने ही शिकायत दर्ज कराई थी. इसके आधार पर कनौजिया के खिलाफ मानहानि अफवाह फैलाने और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. उनके खिलाफ यह मामला सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ टिप्पणियां करने के आरोप में दर्ज किया गया था.

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गिरफ्तारी के बाद प्रशांत कनौजिया के समर्थन में कई लोग और संस्थाएं सामने आईं. पत्रकारों की संस्था एडिटर्स गिल्ड ने उनकी गिरफ्तारी को कानून का ‘खुल्लमखुल्ला दुरुपयोग’, ‘प्रेस को डराने का प्रयास’ और ‘अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोंटने वाला’ बताया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे उन बुनियादी उसूलों के खिलाफ जाने वाला कहा जो इस देश की नींव हैं. कनौजिया की रिहाई की मांग को लेकर नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) से एक मार्च भी निकाला गया. इसमें शामिल पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता भी उनकी गिरफ्तारी को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे थे.

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कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई को तो कठघरे में खड़ा करते हैं लेकिन, इसे अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़ने की कोशिश को गलत करार देते हैं. वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह अपनी एक फेसबुक पोस्ट में लिखते हैं, ‘आरोपित को बचाने के लिए अभिव्यक्ति की आजादी की दुहाई दी जा रही है. जिसकी (मुख्यमंत्री आदित्यनाथ) प्रतिष्ठा पर हमला हुआ है, क्या उसका कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है?’ साथ ही उन्होंने, प्रशांत कनौजिया ने जो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था, उसे देखते हुए कनौजिया के पत्रकार होने पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है.

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अगर प्रशांत कनौजिया के सोशल मीडिया अकाउंट्स को देखें तो ऐसे लोगों की बातें गलत नहीं लगतीं. उन्होंने बीते हफ्ते एक वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था. इसमें एक महिला मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ प्रेम संबंध होने का दावा करती दिखती है. कनौजिया ने इसे अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर करते हुए कैप्शन दिया था, ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी.’ इस ट्वीट के एक जवाब में प्रशांत लिखते हैं, ‘संभालो कहीं योगी भी आसाराम (बलात्कार के आरोपित) न निकले.’ फेसबुक पर इस वीडियो के साथ उन्होंने लिखा था, ‘योगी जी वीडियो चैटिंग कर सकते हो, तो इश्क़ का इज़हार क्यों नहीं? योगी जी आप डरो नहीं मत सोचो समाज क्या कहेगा बस भाग जाओ हम सब आपकी शादी करवा देंगे.’

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प्रशांत कनौजिया ने इससे पहले भी सोशल मीडिया पर कई विवादित टिप्पणियां की हैं. एक ट्वीट में अमित शाह के शपथ ग्रहण वाली तस्वीर को उन्होंने इस कैप्शन के साथ शेयर किया था कि ‘मैं अमित शाह ईश्वर की सुपारी लेता हूं.’ अपने एक ट्वीट में उन्होंने योगी आदित्यनाथ के बारे में लिखा था कि ‘योगी बचपन में भी दंगाई दिखता था.’ जब कोई पत्रकार सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है तो उम्मीद होती है कि उसकी टिप्पणियों में भद्र भाषा, तर्क और तथ्य भी होगें. लेकिन, यहां पर अब कई बार पत्रकार और ट्रोलर्स के बीच का अंतर कम होता दिखने लगा है. इससे न केवल उनकी छवि धूमिल हो रही है बल्कि, मीडिया की विश्वसनीयता पर एक नया संकट भी खड़ा हो रहा है.

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