नरेंद्र मोदी और अक्षय कुमार

विचार | राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘गैर-राजनीतिक’ इंटरव्यू से जुड़ी पांच राजनीतिक बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्षय कुमार के साथ अपने इंटरव्यू में वे सारी बातें बताई हैं जो शायद उनकी प्रतिबंधित फिल्म और वेब सीरीज लोगों को दिखाने वाली थीं

अंजलि मिश्रा | 26 अप्रैल 2019

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अभिनेता अक्षय कुमार को दिए अपने ‘गैर-राजनीतिक’ इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार अपने परिवार और बचपन का जिक्र किया है. यहां वे बार-बार यह बताते हैं कि उनका बचपन बेहद गरीबी में बीता. पहले ही सवाल के जवाब में वे कहते हैं कि आम खरीदने की लक्ज़री उनके परिवार के पास नहीं थी. वहीं, स्कूल में मिली गुल्लक का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि उसमें कुछ डाला जा सके इतने भी पैसे कभी उनके पास नहीं रहे. इन बेहद आम उदाहरणों के जरिए जिस तरह से वे अपने पुराने किस्से बताते हैं, उनसे यह भी अंदाजा लगता है कि इस चुनावी माहौल में अपनी पृष्ठभूमि के जरिए वे देखने-सुनने वालों के साथ कनेक्शन बना लेना चाहते हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के लोगों से अपनी मित्रताओं का जिक्र करते हुए कहते हैं कि वे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद साथ में गप्पें मारा करते थे. इसके अलावा वे यह भी बताते हैं कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी उन्हें कुर्ते और बंगाली मिठाइयां भेजती हैं. विपक्ष के साथ संबंधों को लेकर गाहे-बगाहे नरेंद्र मोदी की आलोचना होती रही है. इसलिए कुछ लोग यह मान सकते हैं कि प्रधानमंत्री ने ये किस्से अपनी छवि सुधारने की मंशा से सुनाए हैं, और शायद यह बताने के लिए भी कि विपक्ष के कुछ नेता अंदर से कुछ और हैं और बाहर से कुछ और. हालांकि नरेंद्र मोदी इन किस्सों को सुनाने से पहले यह भी कहते हैं कि इससे उन्हें चुनाव में नुकसान हो सकता है.

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अक्षय कुमार के साथ अपने साक्षात्कार में नरेंद्र मोदी इस सवाल के जवाब में कि उन्होंने कब पहली बार सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री बनना है, गांधी परिवार पर भी बड़े सधे तरीके से तंज कसते हैं. वे कहते हैं कि केवल उन लोगों के अलावा जो एक विशेष तरह की बैकग्राउंड से आते हैं कोई भी ऐसा नहीं सोच सकता.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में हमेशा यह कहा जाता रहा है कि वे केवल तीन-चार घंटे सोते हैं और अठारह घंटे काम करते हैं. इंटरव्यू के दौरान कई बार वे अपने काम करने के तरीके पर खुलकर और बहुत सारी बात करते हैं. यहां तक कि जब प्रधानमंत्री से उनकी मां के बारे में पूछा जाता है तो वे कहते हैं कि वे अपने काम में इतना मसरूफ रहते हैं कि अगर उनकी मां दिल्ली में होती हैं तो भी उनसे नहीं मिल पाते हैं. वे साक्षात्कार में बताते हैं कि कैसे वे अपना एक मिनट भी बेकार में या आनंद की चीजों पर जाया नहीं करते हैं. जब ऐसे कर्मठ प्रधानमंत्री, एक इतने महत्वपूर्ण चुनाव के ठीक बीच में एक साक्षात्कार के लिए घंटों का समय निकालें तो उसे पूरी तरह से गैर-राजनीतिक सोच पाना किसी के लिए भी आसान नहीं है.

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इस बातचीत के दौरान नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का जिक्र करते हुए कहते हैं कि वे उनके लिए बंगाली मिठाइयां भेजती हैं. वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से दोस्ती पर उनका कहना था कि यह एक-दूसरे से तू कहकर बात करने वाली है. पीएम मोदी ने यह भी बताया कि बराक ओबामा हमेशा उनसे यह पूछते हैं कि उन्होंने अपने सोने का समय बढ़ाया या नहीं? इस पर ज्यादातर लोगों की राय है कि ऐसा कहकर वे फिर से जनसाधारण के बीच इस धारणा को मजबूत करना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख और शान बढ़ाई है.

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