इंडिगो विमान

विचार | व्यापार

इंडिगो एयरलाइन के प्रमोटरों के बीच आखिर किस बात का झगड़ा है?

राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया ने 2006 में इंडिगो की स्थापना की थी

ब्यूरो | 13 जुलाई 2019 | फोटो: फ्लिकर

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भारतीय विमानन क्षेत्र से लगातार बुरी खबरें आ रही हैं. खस्ताहाल जेट एयरवेज के खिलाफ दिवालिया याचिका दाखिल की जा चुकी है. सरकार द्वारा नियंत्रित एयर इंडिया भी जैसे-तैसे चल रही है. इन सबके बीच में भारतीय विमानन क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इंडिगो के प्रमोटर्स के बीच तनातनी की खबरें सुनने को मिल रही हैं.

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ताजा मामले में इंडिगो के एक प्रमोटर और इसमें 37 फीसदी की हिस्सेदारी रखने वाले राकेश गंगवाल ने सेबी को एक चिट्ठी लिखी है. इसमें उन्होंने शिकायत की है कि इंडिगो में 38 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले राहुल भाटिया इसे ठीक से नहीं चला रहे है. गंगवाल ने यहां तक कहा है कि उनका कंपनी को चलाने का तरीका पान की दुकान से भी बदतर हो चला है. इससे कुछ महीने पहले भी इंडिगो के दोनों प्रमोटर्स इस विवाद को लेकर कानूनी फर्मों से संपर्क साध चुके हैं.

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राकेश गंगवाल और राहुल भाटिया ने 2006 में इंडिगो की स्थापना की थी. अमेरिकी नागरिकता रखने वाले राकेश गंगवाल विमानन क्षेत्र के बड़े जानकारों में शुमार हैं. वे एयर फ्रांस और अमेरिकी एयरवेज में उच्च पदों पर रह चुके हैं. दूसरी तरफ, राहुल भाटिया भारत में रहते हैं और यहीं से कंपनी का संचालन देखते हैं. इन दोनों के बीच ताजा विवाद की जो वजह बताई जा रही है, वह मुख्य रूप से कंपनी पर नियंत्रण स्थापित करने और उसकी भविष्य की योजनाओं को लेकर है.

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जानकारों के मुताबिक राकेश गंगवाल इंडिगो को लेकर काफी आक्रामक रणनीति बना रहे हैं और वे वैश्विक स्तर पर एक बजट एयरलाइन के बारे में सोच रहे हैं. उधर, राहुल भाटिया के बारे में माना जाता है कि वे भारतीय विमानन सेक्टर के अस्थिर हालात को देखते हुए इस बारे में सतर्क दृष्टिकोण रखते हैं. इसके चलते वे बहुत आक्रामक विस्तार योजनाओं के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं.

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राकेश गंगवाल की चिट्ठी की खबर आने के बाद कंपनी के शेयर 19 फीसदी तक लुढ़क  गए. लेकिन संकट इससे कहीं बड़ा है. किंगफिशर और जेट एयरवेज के डूबने और एयर इंडिया की खस्ता हालत के बीच इंडिगो से आ रही खबरें पूरे उड्डयन क्षेत्र को ही मुश्किल में डालने वाली हैं. ऐसे में इंडिगो के इन दो बड़े हिस्सेदारों के बीच विवाद जितना बढ़ेगा, भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र भी उतना ही दबाव में आएगा.

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