माइक पोंपियो और नरेंद्र मोदी

विचार | विदेश

जी-20 की बैठक से ठीक पहले हुई अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा का मकसद क्या है?

अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं फिर भी इसका कोई पूर्व निर्धारित एजेंडा नहीं है

ब्यूरो | 27 मई 2019 | फोटो : पीआईबी

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अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो मंगलवार देर रात भारत पहुंचे. अमेरिकी विदेश मंत्री के इस दौरे को लेकर कुछ बातें काफी ध्यान देने वाली हैं. पहली यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब दो दिन बाद ही नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप जी-20 शिखर सम्मेलन में मिलने वाले हैं. दूसरी हैरानी की बात ये है कि माइक पोंपियो तीन दिन की भारत यात्रा पर हैं और फिर भी उनके और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बीच बातचीत का कोई पूर्व निर्धारित एजेंडा नहीं है.

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कूटनीति के जानकार इस यात्रा की कई वजहें बताते हैं. ये लोग कहते हैं कि पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के संबंधों में काफी तनाव आ गया है. दोनों के बीच तनाव का पहला मुद्दा भारत और रूस के बीच हुई एस- 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का समझौता है. चालीस हजार करोड़ की इस डील पर अमेरिका को शुरू से ही गहरी आपत्ति है. उसने दुनिया भर में एस- 400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के समझौते रोकने के लिए एक कानून भी बनाया है. सूत्रों की मानें तो माइक पोंपियो के भारत आने की सबसे बड़ी वजह यही है.

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पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंध भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं हैं. भारतीय स्टील और एल्युमिनियम पर शुल्क लगाने के बाद, हाल में ही अमेरिका ने तमाम भारतीय उत्पादों को मिलने वाली छूट भी खत्म कर दी है. अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत ने भी कई अमेरिकी उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया है. भारत और अमेरिका के बीच इस समय एक बड़ा मुद्दा ईरान पर लगे प्रतिबंधों का भी है. अमेरिका ने भारत को आश्वस्त किया था कि वह प्रतिबंधों के दौरान उसकी तेल की जरूरतों का ख्याल रखेगा. लेकिन हाल ही में मध्यपूर्व में तेलवाहक जहाजों के प्रमुख रास्ते हार्मुज में कई तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद से तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. बताया जाता है कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका का पूरा सहयोग चाहता है.

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विदेश मामलों के जानकार कहते हैं कि इस समय अमेरिका और भारत के बीच इतने ज्यादा मुद्दे हैं कि उनके चलते अमेरिकी विदेश मंत्री की यात्रा का कोई एजेंडा सेट नहीं है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान से भी कुछ ऐसा ही मतलब निकलता है. माइक पोंपियो के साथ बैठक से पहले एस जयशंकर ने कहा, ‘भारत एक सकारात्मक रुख के साथ बातचीत की मेज पर जाएगा ताकि आपसी सहमति के आधार पर मुद्दे सुलझाए जा सकें.’

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इसके अलावा चीन ने पिछले दिनों कहा था कि भारत, रूस और चीन अमेरिका की कारोबारी तानाशाही को खत्म करने की दिशा में काम कर रहे हैं. चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस रणनीति पर पहली बैठक इस महीने की शुरुआत में किर्गिस्तान में हो चुकी है और दूसरी जी-20 शिखर सम्मलेन के दौरान होगी. जानकार मानते हैं कि इसने अमेरिका को बेचैन कर दिया है और इसलिए भी वह भारत के साथ जल्द ही कई मुद्दों पर सहमति बनाना चाहता है.

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