बीेजेपी-जेडीयू

विचार | राजनीति

भाजपा और जेडीयू के बीच चल रहे संघर्ष में ताजा रुझान क्या हैं?

नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू और भाजपा के बीच साथ होने के बाद भी लंबे समय से मतभेद चल रहे है

ब्यूरो | 13 जुलाई 2019

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बिहार में भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार के बीच चल रहे शह और मात के खेल में एक और राउंड भाजपा ने अपने नाम कर लिया है. भाजपा और नीतीश कुमार के बीच यह खेल सितंबर, 2017 से ही चल रहा है. उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया लेकिन जेडीयू के किसी भी सांसद को अपनी टीम में जगह नहीं दी थी. 

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इसके बाद यह खेल लोकसभा चुनावों के लिए टिकटों के बंटवारे में खेला गया. पहले हमेशा भाजपा से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने वाली जेडीयू को 2019 के लोकसभा चुनावों में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार होना पड़ा. भाजपा को जेडीयू के मुकाबले बिहार में एक लोकसभा सीट अधिक मिली है. इसका असर यह रहा कि जब केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने लगी तो उसमें जेडीयू उचित हिस्सेदारी नहीं मिलने की वजह से सरकार में शामिल ही नहीं हुई. जवाब में नीतीश कुमार ने बिहार में अपना मंत्रिमंडल विस्तार किया और जिन आठ लोगों को मंत्री बनाया उसमें भाजपा का कोई नेता शामिल नहीं है.

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दोनों पक्षों के बीच अब शह और मात का खेल मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से 100 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर है. बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते थे कि चमकी बुखार से बच्चों की हुई मौतों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंगल पांडे स्वास्थ्य मंत्री के पद से इस्तीफा दें. नीतीश कुमार ने इसके लिए भाजपा पर काफी दबाव बनाया

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लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई. भाजपा की ओर से नीतीश कुमार को यह साफ बता दिया गया कि मंगल पांडे के इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता. भाजपा को लगता है कि साल भर बाद होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए नीतीश कुमार के सामने भाजपा के साथ बने रहने के अलावा कोई और व्यावहारिक विकल्प नहीं है. इस मामले में अब तक जो हुआ है, उससे लगता है कि नीतीश कुमार को एक बार फिर भाजपा ने पटखनी दे दी है.

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भाजपा के साथ दूसरी पारी में नीतीश कुमार को अब तक का सबसे बड़ा सांत्वना पुरस्कार उनकी पार्टी के राज्यसभा सांसद हरिवंश को राज्यसभा का उपसभापति बनने से मिला है. हालांकि, कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि भाजपा के पास अपने उम्मीदवार को इस पद पर पहुंचाने के लिए जरूरी संख्या नहीं थी, इसलिए उसने जेडीयू के हरिवंश का नाम उपसभापति के तौर पर आगे बढ़ाया. बहरहाल, भाजपा और जेडीयू दोनों पार्टियों के लोगों की बातों से लगता है कि दोनों पक्षों के बीच चल रहा शह और मात का खेल अभी थमने वाला नहीं है और कोई अंतिम नतीजा आने से पहले इस खेल में अभी कई और राउंड बाकी हैं.

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