शेख हसीना

विचार | विदेश

बांग्लादेश में हुए आम चुनावों की विश्वसनीयता पर इतने सवाल क्यों खड़े किये जा रहे हैं

बांग्लादेश के आम चुनावों में शेख हसीना के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 300 में से 288 सीटों पर जीत हासिल की है

ब्यूरो | 03 जनवरी 2019 | फोटो: पीआईबी

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बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रचंड बहुमत से जीत हुई है. उनकी पार्टी आवामी लीग के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 300 संसदीय सीटों में से 288 पर कब्जा जमा लिया है. इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी के साथ लगभग सभी विपक्षी पार्टियों ने गठबंधन किया था. लेकिन इस गठबंधन को केवल सात सीटें ही मिली हैं. इनमें से पांच बीएनपी के खाते में गईं हैं.

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दुनिया भर में बांग्लादेश के चुनावों पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं. जानकारों का मानना है कि किसी भी लोकतंत्र में इस तरह के चुनाव परिणाम आना लगभग असंभव है. पिछली बार जब बीएनपी ने चुनावों का बहिष्कार कर दिया था तब भी शेख हसीना को इतनी बड़ी जीत नहीं मिली थी. इस बार उनके पक्ष में परिणाम आने की उम्मीद तो थी लेकिन विपक्ष के एकजुट होने की वजह से इतनी बड़ी जीत की उम्मीद किसी को नहीं थी.

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बांग्लादेश में मतदान वाले दिन बड़े स्तर पर धांधली की खबरें आई थीं. राजधानी ढाका में ही कई वोटरों का कहना था कि उन्हें आवामी लीग को वोट देने के लिए मजबूर किया गया. कई वोटरों ने अपने सामने धांधली किए जाने और सत्ताधारी पार्टी के एजेंटों द्वारा धमकाए जाने की भी बात कही है. बीबीसी के मुताबिक चिटगांव में एक पोलिंग बूथ पर मतदान होने से पहले ही मत पेटियां भर चुकी थीं. बांग्लादेशी समाचार पत्र डेली स्टार के मुताबिक आवामी लीग के कार्यकर्ताओं के डर की वजह से अधिकांश मतदान केंद्रों पर विपक्षी पार्टियों के एजेंट तक नहीं थे.

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बांग्लादेश में शेख हसीना की जीत पर वहां का मीडिया भी ज्यादा कुछ बोल नहीं पा रहा है. वहां के पत्रकारों में इस बात का डर है कि अगर उन्होंने सरकार की आलोचना की तो उन्हें इसके खतरनाक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. बीते सितम्बर में शेख हसीना की सरकार ने एक नया कानून बनाया था जिसका मकसद मीडिया पर लगाम कसना है. इसके तहत सरकार के खिलाफ लिखने पर जेल तक की सजा हो सकती है. आलोचकों का कहना है कि इस कानून के तहत सरकार को असंतुष्टों और पत्रकारों पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल गया है.

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शेख हसीना का सत्ता में आना भारत के लिहाज से अच्छी बात है. उन्हें भारत का समर्थक और खालिदा जिया को पाकिस्तान का पक्षधर माना जाता है. भारत को डर था कि अगर खालिदा की पार्टी बीएनपी सत्ता में आती है तो वह उन आतंकी संगठनों को फिर बढ़ावा देगी जिन पर हसीना ने लगाम कस रखी थी. बीएनपी के सत्ता में आने पर बांग्लादेश के चीन के पाले में चले जाने की भी आशंका थी.

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