जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग

विचार | विदेश

डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी कंपनी ह्वावे को लेकर अचानक यूटर्न क्यों ले लिया?

चीन की कंपनी ह्वावे के खिलाफ काफी समय से मोर्चा खोले अमेरिका ने अब उसे अपने देश से उपकरण और तकनीक खरीदने की इजाजत दे दी है

ब्यूरो | 11 जुलाई 2019 | फोटो : facebook / Xi’s Moments

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पिछले दिनों जापान में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन से सबसे बड़ी खबर अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध पर आयी. अमेरिका ने चीन को राहत देते हुए पहली बार इस मसले पर अपने कदम पीछे खींचे. दोनों के बीच हुए एक शुरूआती समझौते के मुताबिक जब तक दोनों देश किसी बड़े समझौते पर नहीं पहुंचते तब तक अमेरिका चीनी उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएगा. वह चीनी कम्पनी ह्वावे पर लगे प्रतिबंध भी हटा देगा. इसके बदले चीन सोयाबीन जैसे अमेरिका के प्रमुख कृषि उत्पादों की खरीद फिर से शुरू करेगा.

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अमेरिका ने बीते दो सालों से धोखाधड़ी, जासूसी और बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाते हुए पूरी दुनिया में ह्वावे के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. उसकी इस कार्रवाई का दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्माता कम्पनी के व्यापार पर गहरा असर पड़ा है. ह्वावे, गूगल, इंटेल जैसी सबसे बड़ी कंपनियों के सबसे बड़े खरीददारों में शामिल है. ऐसे में इन कंपनियों से उपकरण और तकनीक न ख़रीद पाने की वजह से दुनिया भर में उसके व्यापार को तगड़ा झटका लगा.

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ह्वावे को सबसे बड़ा झटका गूगल से मिला जिसने हुआवे के लिए अपने स्मार्टफोन ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड की सेवायें बंद कर दीं. उसके स्मार्टफोन्स की बिक्री का आधे से ज्यादा हिस्सा चीन से बाहर से ही आता है. इस साल की शुरुआत में वह इनकी बिक्री के मामले में केवल सैमसंग से पीछे थी. लेकिन, एंड्रॉइड लाइसेंस रद्द होने के बाद से इसमें 40 फीसदी की गिरावट आयी है.

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अमेरिकी जानकार ह्वावे को लेकर ट्रंप द्वारा कुछ महीनों के अन्दर ही यूटर्न लेने के पीछे कई वजहें बताते हैं. इनके मुताबिक ट्रंप प्रशासन की लाख चेतावनियों के बाद भी अमेरिका के सहयोगी देश 5-जी तकनीक को लेकर ह्वावे से समझौते कर रहे हैं. खुद अमेरिकी कंपनियां भी डोनाल्ड ट्रंप पर ह्वावे को लेकर दबाव बना रही थीं. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी कंपनियों ने 2018 में ह्वावे के साथ करीब 11 अरब डॉलर की डीलें की हैं. अब अगर ये डीलें टूटती हैं तो इन कंपनियों का बड़ा नुकसान होगा.

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एक अन्य अमेरिकी सर्वेक्षण के मुताबिक अगर अमेरिका में ह्वावे जैसी चीनी कंपनियों पर लगा प्रतिबंध जारी रहता है तो अगले पांच सालों में अमेरिकी आयात को 56 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है. इसके चलते 70 हजार से ज्यादा लोग अपनी नौकरियां भी खो सकते हैं. बताते हैं कि इन्हीं वजहों के चलते डोनाल्ड ट्रंप ने ह्वावे पर लगे प्रतिबंध खत्म कर दिये हैं.

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