आम आदमी पार्टी, कांग्रेस

विचार | राजनीति

दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन किन शर्तों पर हो सकता है?

दिल्ली में सात लोकसभा सीटें हैं और पिछले चुनावों में इन सभी पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी

ब्यूरो | 15 अप्रैल 2019

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दिल्ली में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बातचीत अब नई शर्तों पर आ गई है. हाल तक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) इस बात पर अड़ी थी कि वह कांग्रेस को दिल्ली में तीन सीटें तब ही देगी जब कांग्रेस उसे हरियाणा में तीन सीटें दे. लेकिन कांग्रेस इस समझौते के लिए तैयार नहीं हुई. इसके बाद आप ने हरियाणा में दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया.

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अब फिर से आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन की बात चल रही है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चाहते हैं कि यह गठबंधन हो. आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी सार्वजनिक तौर पर ऐसी ही इच्छा जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में अब दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की नई शर्त यह है कि दिल्ली में आप चार सीटों पर चुनाव लड़े और कांग्रेस तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे.

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इसके साथ ही आम आदमी पार्टी की एक मांग यह भी है कि कांग्रेस दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की उसकी मांग का समर्थन करे. बताया जा रहा है कि आप लगातार इस बात के लिए दबाव बनाए हुए है कि कांग्रेस अपने घोषणापत्र में संशोधन करे और उसमें इस बात को भी शामिल करे.

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कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो कांग्रेस घोषणापत्र में अलग राज्य पर स्पष्ट वादा करने के बजाय यह कह सकती है कि वह इस मसले पर एक समिति बनवाकर उचित निर्णय लेगी. कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस इतना भी कर देती है कि तो आप की बात भी आंशिक तौर पर रह जाएगी और उसकी उतनी राजनीतिक किरकिरी भी नहीं होगी.

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इस खींचतान के बावजूद दोनों पार्टियों के अधिकांश नेताओं को लगता है कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो भाजपा फिर से दिल्ली की सातों सीटों पर जीत हासिल कर सकती है. लेकिन अगर गठबंधन हो गया तो यह स्थिति उलट भी सकती है. उम्मीद की जा रही है कि अगले एक-दो दिनों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी औपचारिक गठबंधन की घोषणा कर देंगी.

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