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विचार और रिपोर्ट | अर्थव्यवस्था

बेरोजगारी से जुड़े पांच आंकड़े जिन पर चुनावों के दौरान गौर किया जाना चाहिए

कुछ दिन पहले एनएसएसओ की एक लीक्ड रिपोर्ट खासी चर्चा में रही थी. इसके मुताबिक अभी बेरोजगारी की दर बीते 45 सालों में सबसे ज्यादा (6.1 फीसदी) है

ब्यूरो | 20 अप्रैल 2019 | फोटो: पिक्साबे

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नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में बेरोजगारी दर लगभग 5 फीसदी के करीब थी. यह चिंताजनक है कि बीते सालों में लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट पचास फीसदी तक कम हुआ है. यानी देश की उस जनसंख्या, जिसकी उम्र काम करने लायक है, में से केवल आधे लोगों के पास रोजगार है. इन आंकड़ों की तुलना अगर बाकी एशियाई देशों से करें तो चीन में 75 फीसदी, वियतनाम में 77 फीसदी, इंडोनेशिया में 70 फीसदी लोगों के पास रोजगार है. यहां तक कि थाईलैंड 69 फीसदी और बांग्लादेश 57 फीसदी लोगों को रोजगार देकर इस रेस में भारत से आगे हैं.

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भारत में रोजगार पाने वाले लोगों का आंकड़ा इस बात पर भी निर्भर करता है कि वे कहां रह रहे हैं. इसके लिए दो तरह के राज्यों के आंकड़ों की तुलना करते हैं, पहले वे जो कुछ समय पहले ही विकास की दौड़ में शामिल हुए हैं जैसे – छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गुजरात. और दूसरे वे जहां शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति बाकी राज्यों की तुलना में सबसे अच्छी रही है जैसे – त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और केरल.

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छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गुजरात में बेरोजगारी का आंकड़ा डेढ़ से दो प्रतिशत है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ये राज्य लगातार कारोबारी सुगमता की ओर ध्यान दे रहे हैं यानी नए उद्योगों को अपने राज्य में आने के लिए अनुकूल माहौल बना रहे हैं. इसके उलट मानव विकास सूचकांक में अच्छे नंबर पाने वाले राज्य ज्यादा रोजगार सृजन नहीं कर पा रहे हैं. पहली तरह के राज्यों के उलट केरल में बेरोजगारी दर 12.5 फीसदी, त्रिपुरा में 19.7 फीसदी और हिमांचल प्रदेश में 10.6 फीसदी है. इसकी पहली वजह कारोबारी सुगमता पर ध्यान न देना ही ठहराई जा सकती है.

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युवाओं की बात करें तो ग्रेजुएशन की डिग्री ले चुके लगभग 35 फीसदी युवा बेरोजगार हैं, वहीं अपेक्षाकृत कम या गैर पढ़े-लिखे युवावर्ग में बेरोजगारी का यह आंकड़ा 6.2 फीसदी है. इसके अलावा उन बेरोजगार युवाओं का आंकड़ा 13.5 फीसदी है, जिनकी उम्र 30 साल से कम है. यहां पर एक बार फिर गुजरात 2.7 फीसदी और कर्नाटक 4.4 फीसदी युवा बेरोजगारों के आंकड़े के साथ केरल, त्रिपुरा या हिमाचल प्रदेश से बेहतर स्थिति में दिखाई देते हैं जहां युवा बेरोजगारों की संख्या तीस फीसदी से ज्यादा है.

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महिलाओं की बात करें तब भी य़ह आंकड़े लगभग ऐसे ही हैं. सबसे अधिक साक्षरता दर वाले राज्य केरल में लगभग एक तिहाई महिलाएं बेरोजगार हैं. कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और गुजरात में महिलाओं के बेरोजगार होने की दर डेढ़ से दो प्रतिशत के बीच है. हालांकि इन राज्यों में भी मजदूर वर्ग की महिलाओं की संख्या और हालत दोनों ही खराब कहे जा सकते हैं. इस तरह ये सारे आंकड़े, तैयार किए जा रहे रोजगार के विकल्पों और शिक्षा पद्धति की गुणवत्ता पर कई सवाल खड़े करते हैं, जो इन चुनावों के पहले पूछे जाने चाहिए थे.

ब्लूमबर्ग.कॉम की रिपोर्ट पर आधारित.

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