रॉबर्ट वाड्रा और प्रियंका गांधी

विचार और रिपोर्ट | राजनीति

क्या रॉबर्ट वाड्रा कमजोरी के बजाय भाजपा के खिलाफ प्रियंका गांधी का हथियार बन सकते हैं?

प्रियंका गांधी न केवल रॉबर्ट वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर उनके साथ जा रही हैं बल्कि पिछले कुछ समय से उनके साथ पहले से ज्यादा दिख भी रही हैं

ब्यूरो | 15 फरवरी 2019 | फोटो : प्रियंका गांधी / फेसबुक

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2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के कई नेता अक्सर अपनी चुनावी सभाओं में रॉबर्ट वाड्रा के कथित भ्रष्टाचार का मसला भी उठाते थे. उस वक्त भाजपा की ओर से लगातार यह कहा जाता था कि केंद्र में अगर उनकी सरकार आई तो रॉबर्ट वाड्रा सलाखों के पीछे होंगे. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद भाजपा लगातार रॉबर्ट वाड्रा का मसला उठाती जरूर रही लेकिन इस मामले में कुछ खास प्रगति होती नहीं दिखी.

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कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि ऐसा जान-बूझकर किया गया ताकि प्रियंका गांधी के मन में यह रहे कि अगर वे सियासत में आती हैं तो उनके पति पर कार्रवाई की जा सकती है. अब जब प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी के तौर पर राजनीति में सक्रिय हो गई हैं तो फिर से भाजपा की ओर से रॉबर्ट वाड्रा का मसला उठाया जा रहा है. जिन मामलों में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन मामलों में रॉबर्ट वाड्रा को केंद्र सरकार की एजेंसियां लगातार लंबी पूछताछ के लिए बुला रही हैं.

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रॉबर्ट वाड्रा के मसले पर प्रियंका गांधी अब जो रुख दिखा रही हैं, उससे लगता है कि अपने पति पर लग रहे आरोपों पर पहले की तरह चुप रहने या रक्षात्मक होने के बजाए वे आक्रामक राजनीति करने वाली हैं. प्रियंका गांधी न केवल रॉबर्ट वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर प्रवर्तन निदेशालय छोड़ने के लिए जा रही हैं बल्कि पिछले कुछ समय से उनके साथ पहले से ज्यादा दिख भी रही हैं.

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इससे साफ है कि वाड्रा से होने वाली पूछताछ या उनके खिलाफ होने वाली हर कार्रवाई को कांग्रेस राजनीतिक प्रतिशोध के लिए की जाने वाली कार्रवाई के तौर पर पेश कर सकती है. और अगर केंद्रीय एजेंसिया रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कुछ नहीं करती है तो प्रियंका गांधी ‘पीड़ित’ कार्ड खेलते हुए यह कह सकती हैं कि अगर वाकई उनके पति ने कोई गलती की है तो उनके खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई.

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यानी कि इस समय मोदी सरकार के सामने ऐसी स्थिति है कि अगर वह रॉबर्ट वाड्रा के मामले में कुछ करती है तो उसका प्रियंका औऱ कांग्रेस फायदा उठा सकते है. और अगर वह वाड्रा के खिलाफ कुछ नहीं करती है तो इससे भाजपा का नुकसान हो सकता है.

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