बाबा रामदेव

विचार और रिपोर्ट | कारोबार

टीवी पर पतंजलि के विज्ञापन अब इतने कम क्यों दिखाई देने लगे हैं?

बीते कई सालों से पतंजलि हर साल करीब 500 करोड़ रुपये विज्ञापनों पर खर्च करती रही है

ब्यूरो | 14 दिसंबर 2018 | फोटो: फेसबुक/पतंजलि परिधान

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बीते एक साल में बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के टीवी पर प्रसारित होने वाले विज्ञापनों में भारी कमी आई है. पतंजलि साल 2017 में टीवी पर विज्ञापन देने के मामले में शुरुआती तीन कंपनियों में थी. लेकिन साल 2018 की पहली छमाही में वह दसवें स्थान पर पहुंच गई. इसके अलावा प्रिंट विज्ञापनों के मामले में भी पतंजलि तीन स्थान लुढ़ककर सातवें से दसवें स्थान पर आ गई है.

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बार्क द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 2017 में पतंजलि के औसतन पच्चीस हज़ार बार टीवी विज्ञापन प्रति सप्ताह दिखाई देते थे. इस साल यह आंकड़ा घटकर सोलह हजार हो गया है. विज्ञापनों में बाबा रामदेव की उपस्थिति की बात करें तो मार्च 2016 के आखिरी हफ्ते में वे अलग-अलग टीवी चैनलों पर 2,34,934 बार नजर आए थे. अब वे अपनी कंपनी के विज्ञापनों में न के बराबर ही नज़र आते हैं.

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पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि ‘यह फैसला सोच-समझकर लिया गया है क्योंकि हम अपने उत्पादों की बढ़ती मांग के अनुसार सप्लाई नहीं कर पा रहे थे.’ बालकृष्ण यह भी कहते है कि वे पहले स्टॉक और सप्लाई चेन में आ रही शिकायतों को दूर करेंगे और उसके बाद विज्ञापन और अपने प्रतिद्वंदियों को पीछे छोड़ने पर ध्यान लगाएंगे.

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जानकार बताते हैं कि पतंजलि हर साल अपने कारोबार का पांच फीसदी यानी लगभग 500 करोड़ रुपए विज्ञापनों पर बहुत समझदारी से खर्च करती है. इसके ज्यादातर विज्ञापन एंटरटेनमेंट चैनलों की बजाय न्यूज चैनलों पर आते हैं. ये चैनल अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं और हर तरह के लोगों तक उनकी पहुंच होती है. आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक टीवी के साथ-साथ अब पतंडलि डिजिटल विकल्पों पर भी विचार कर रही है.

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इसके अलावा पतंजलि जल्दी ही मार्केट के अलग-अलग सेग्मेंट्स में उतरने की तैयारी में है. पतंजलि ने हाल ही में कपड़ों का अपना ब्रांड परिधान भी लॉन्च किया है. इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज कराने के लिए कंपनी को काफी धन की आवश्यकता होगी. बताया जा रहा है कि विज्ञापनों में कटौती इसी जरूरत को पूरा करने के लिए उठाये गये कदमों में से एक हो सकती है.

द प्रिंट की रिपोर्ट पर आधारित

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