नरेंद्र मोदी

विचार और रिपोर्ट | राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी पांच बातें जो ध्यान खींचती हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को भाजपा के दिल्ली मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस की थी

ब्यूरो | 18 जून 2019 | फोटो: भाजपा / सोशल मीडिया

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भाजपा के दो सबसे बड़े नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों की आवाज वहां मौजूद लोगों को भी ढंग से सुनाई दे सके, इसका इंतजाम नहीं किया गया था. खुद भाजपा के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो में भी यह आवाज मौजूद नहीं है. इस वीडियो में केवल अमित शाह के जवाब ही सुने जा सकते हैं, पत्रकारों के सवाल नहीं. भाजपा मुख्यालय के बारे में यह बात प्रचारित रही है कि यहां पर कमाल की तकनीकी सुविधाएं हैं और इसके पहले होने वाले आयोजनों में इस तरह की कोई खामी देखने को नहीं मिली थी. पत्रकार वार्ता में शामिल होने वाले कई पत्रकारों ने अपनी सोशल मीडिया टिप्पणियों में यह बात दोहराई है.

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पत्रकारों के सवाल-जवाब शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करीब 15 मिनट तक बोले. अपने इस वक्तव्य में उन्होंने मीडिया से जुड़ी तमाम अनौपचारिक बातों के साथ विरोधियों को भी निशाने पर लिया. इस दौरान उन्होंने अपने चुनावी अभियान का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि पिछली बार बहुमत देने के लिए उन्होंने जनता को धन्यवाद दिया है और इस बार भी वे भारी बहुमत से दोबारा सरकार बनाने जा रहे हैं. हमेशा की तरह प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी दोहराया कि इतिहास में यह पहली बार होने जा रहा है. हालांकि इस दौरान पूरे समय उन पर चुनावी अभियान की थकान हावी दिखी. राजनीति के कुछ जानकार इसे हार की आशंका से उपजी हताशा की तरह भी देख रहे हैं.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तरफ से तो काफी बातें कहीं, लेकिन उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया. हमेशा बोलने के लिए चर्चा में रहने वाले प्रधानमंत्री पांच सालों में आए इस ऐतिहासिक मौके पर भी कुछ भी बोलने से बचते दिखाई दिए. जो सवाल सीधे प्रधानमंत्री से पूछे गए उनके जवाब भी अमित शाह ने दिए. इनमें से कुछ को नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए टाल दिया कि उन्हें भाजपा अध्यक्ष पर पूरा भरोसा है, वे ही इसका जवाब देंगे. यहां तक कि बार-बार प्रधानमंत्री मोदी से सवाल किए जाने पर अमित शाह का भी कहना था कि हर सवाल का जवाब प्रधानमंत्री दें यह जरूरी नहीं है.

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अब भाजपा चाहे तो मोदी जी की चुप्पी का यह कहते हुए बचाव कर सकती है कि यह ‘प्रधानमंत्री’ नरेंद्र मोदी की नहीं बल्कि भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष ने सभी सवालों के जवाब दिए हैं. लेकिन इस एक घंटे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यवहार और देहबोली लगातार उनकी असहजता का परिचय दे रही थी. इसके पहले लगातार चुनावी अभियान करने के बावजूद, किसी भी सार्वजनिक उपस्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतने व्यग्र और चिंतित नज़र नहीं आए थे. इसने एक बार फिर उनके विरोधियों को यह कहने का मौका दे दिया है कि वे सवालों का सामना करने से बचना चाहते हैं.

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यह बात भी खास तौर पर ध्यान देने वाली रही कि अमित शाह ने लगभग हर सवाल के जवाब में यह कहा कि उनकी पार्टी तीन सौ से ज्यादा सीटें ला रही है. लेकिन इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स के किसी भी वीडियो में पत्रकारों के सवाल स्पष्ट नहीं सुनाई देते हैं, इसलिए अंदाजा लगाना मुश्किल है कि वे किन सवालों के जवाब में यह बात दोहरा रहे थे. लेकिन वे भी जिस तरह से इन्हें बार-बार दोहराते हैं, कुछ लोगों को जरूर खटक सकता है.

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