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विचार और रिपोर्ट | अर्थव्यवस्था

क्या किसानों के कर्ज माफ करने वाले राज्य ऐसा करने की हालत में हैं?

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बाद अब राजस्थान ने भी किसानों के कर्ज माफ करने का ऐलान कर दिया है

ब्यूरो | 21 दिसंबर 2018 | फोटो: पिक्साबे

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बुधवार को राजस्थान सरकार भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की नई कांग्रेस सरकारों की राह पर चल पड़ी. राज्य के नए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ऐलान किया कि किसानों के दो लाख रु तक के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे. यह कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर भी दबाव बना रही है जिसने कुछ महीने पहले कहा था कि किसानों को कर्ज माफी देने की उसकी कोई योजना नहीं है. इससे कुछ दिन पहले ही भाजपा शासित उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की सरकारं ने किसानों के लिए कर्ज माफी का ऐलान किया था. अब सवाल उठता है कि क्या ये राज्य इस कवायद का बोझ उठाने की हालत में हैं?

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छत्तीसगढ़ में सरकार ने कुल मिलाकर 6100 करोड़ रु का कर्ज माफ किया है. यह रकम 2017-18 में राज्य के 78,623 करोड़ रु के बजट के लगभग 7.8 फीसदी के बराबर है. उधर, राज्य की देनदारियां देखें तो ये इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 16.3 फीसदी के बराबर बैठती हैं. ये आंकड़ा सभी राज्यों के औसत – 24 फीसदी – से ठीक-ठाक नीचे हैं. इसका मतलब यह है कि छत्तीसगढ़ इस अतिरिक्त बोझ को सह सकता है.

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लेकिन मध्य प्रदेश और राजस्थान में मामला अलग हो जाता है. मध्य प्रदेश में किसानों के दो लाख रु तक के कर्ज माफ करने की लागत 35 से 38 हजार करोड़ के बीच बैठेगी. यह आंकड़ा बीते वित्तीय वर्ष में राज्य के कुल बजट – 164,295 करोड़ रु – के 20 फीसदी से भी ज्यादा है. इस पर कर्ज का आंकड़ा भी जीएसडीपी के 25 फीसदी से ज्यादा है. यानी मध्य प्रदेश के लिए यह राह मुश्किल है.

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राजस्थान में तो मामला और खराब है. सूबे की देनदारियों और इसके सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात 33 फीसदी है. यही वजह है कि राजस्थान सरकार ने उन्हीं किसानों का दो लाख रु तक का कर्ज माफ किया है जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है और जो लोन की किश्तें वक्त पर नहीं चुका पाए हैं. लेकिन तब भी राज्य के खजाने पर करीब 18 हजार करोड़ रु का बोझ पड़ना है.

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अगर हम इससे पहले किसानों का कर्ज माफ करने वाले दूसरे राज्यों की बात करें तो इनमें पंजाब की हालत बहुत खस्ता है. यहां अपने चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने सभी किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ करने का वादा किया था. यह रकम करीब 67 हजार करोड़ रु है. अब कांग्रेस सरकार कर्ज माफी की योजना को बहुत धीरे-धीरे और कई चरणों में लागू कर रही है. इसकी वजह यह है कि 31 मार्च 2018 तक राज्य की देनदारियां एक लाख 96 हजार 40 करोड़ रु थीं. यह आंकड़ा राज्य के कुल सकल घरेलू उत्पाद का 42.1 फीसदी है. हालांकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में स्थिति कुछ बेहतर है क्योंकि इन राज्यों का बजट आकार बड़ा है और देनदारियों और सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात ठीक-ठाक.

इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट पर आधारित

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