लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा

विचार और रिपोर्ट | राजनीति

लालकृष्ण आडवाणी द्वारा अपने ब्लॉग में कही गई पांच प्रमुख बातें

वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने एक लंबे समय बाद अपने ब्लॉग के जरिए सार्वजनिक रूप से कुछ मुद्दों पर अपनी राय रखी है

ब्यूरो | 05 अप्रैल 2019 | फोटो: फ्लिकर

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06 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है इसलिए ब्लॉग की शुरूआत करते हुए, पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने लिखा है कि ‘भाजपा में हम सबके लिए यह मौका अतीत, भविष्य और अपने आप में झांककर देखने का है.’ इस बार गांधीनगर सीट से आडवाणी की बजाय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को टिकट दिया गया है. इस पर कोई सीधी टिप्पणी न करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘मैं इस मौके को गांधीनगर के लोगों का आभार व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल करना चाहूंगा जिन्होंने मुझे 1991 से अब तक छह बार चुना है. उनका प्रेम और सहयोग हमेशा अभिभूत करने वाला रहा.’

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लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में भाजपा में आज की अपनी स्थिति के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहते हुए पार्टी से अपने संबंध के बारे में सिर्फ इतना कहा है कि ‘14 साल की उम्र में जब से मैं आरएसएस में शामिल हुआ, तब से मातृभूमि की सेवा करना मेरा जुनून और उद्देश्य रहा है. पहले भारतीय जन संघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी दोनों के ही स्थापक सदस्य के तौर पर बीते सात दशकों में मैं कभी पार्टी के साथ रहा हूं.’ उनका यह भी कहना था कि ‘मैंने हमेशा नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट सेल्फ लास्ट (राष्ट्र सबसे पहले, पार्टी उसके बाद, सबसे अंत में खुद) के सिद्धांत पर चलने की कोशिश की है और आगे भी करता रहूंगा.’

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ज्यादातर बातों की तरह सीधे कुछ न कहते हुए भी वरिष्ठ भाजपा नेता ने इस ब्लॉग में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह कहते हुए निशाने पर लिया है कि ‘अपनी शुरूआत से ही भाजपा ने कभी भी अपने राजनीतिक विरोधियों को दुश्मन की तरह नहीं देखा, वे केवल विरोधी माने गए. इसी तरह हमसे सहमत ना होने वालों को हमने कभी राष्ट्रविरोधी भी नहीं कहा. पार्टी ने हमेशा नागरिकों की व्यक्तिगत और राजनीतिक रुझानों का सम्मान किया है.’ उनकी इस टिप्पणी को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कांग्रेस पर लगातार किए जा रहे हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है.

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पार्टी और लोकतंत्र की बात करते हुए एलके आडवाणी ने इशारों-इशारों में वर्तमान राजनीति में सुधार के कुछ सुझाव भी दिए हैं. वे लिखते हैं कि ‘पार्टी के भीतर और राष्ट्रीय पटल, दोनों ही पर लोकतंत्र और लोकतंत्र की परंपरा की रक्षा करना, भाजपा की पहचान रही है. भाजपा हमेशा मीडिया सहित सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, गरिमा, निष्पक्षता और मजबूती की पक्षधर रही है. चुनावी सुधार या राजनीतिक और चुनावी फंडिग के मामले में पारदर्शिता बरतना भी हमेशा पार्टी की प्राथमिकता रही है.’ खास यह है कि अपने इस ब्लॉग में पार्टी और देश में लोकतांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल किए जाने की बात लालकृष्ण आडवाणी ने बार-बार कही है.

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लालकृष्ण आडवाणी ने सत्य, राष्ट्र निष्ठा, लोकतंत्र, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सु-राज का जिक्र करते हुए इस बात की उम्मीद जताई है कि पार्टी इनका ध्यान रखेगी. इसके अलावा आगे आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए उनका कहना यह भी था कि ‘यह सही है कि चुनाव लोकतंत्र का त्यौहार है लेकिन इसके साथ ही यह भारतीय लोकतंत्र के हिस्सों जैसे – राजनीतिक पार्टियों, मीडिया हाउस, चुनाव सम्पन्न करवाने वाली संस्थाओं और सबसे ऊपर मतदाताओं के ईमानदार आत्मनिरीक्षण करने का समय भी है.’

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