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विचार और रिपोर्ट | शेयर बाजार

बजट के बाद से भारतीय शेयर बाजार रूठा-रूठा क्यों है?

आम चुनाव के बाद उम्मीदों से भरे दिख रहे शेयर बाजार का माहौल अचानक बजट के बाद से निराशा में बदल गया है

ब्यूरो | 31 जुलाई 2019 | फोटो: फ्लिकर

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जुलाई महीने की शुरुआत में बजट आने के फौरन बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. इसके बाद से अब तक भारतीय शेयर बाजारों के पूंजीकरण में 2.8 लाख करोड़ से ज्यादा की कमी आ चुकी है. सवाल यह है कि आम चुनाव के बाद उम्मीदों से भरे दिख रहे शेयर बाजार का माहौल अचानक निराशा में क्यों बदल गया? आर्थिक जानकारों के मुताबिक बाजार की इस गिरावट के मूल में बजट के कई प्रावधान हैं.

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बाजार में गिरावट की फिलहाल सबसे बड़ी वजह यह है कि विदेशी निवेशक लगातार शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. बजट के बाद से अब तक इन निवेशकों ने शेयर बाजार से सात हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की रकम निकाल ली है. इसने बाजारों में बिकवाली का माहौल बना दिया है. इसकी सबसे बड़ी वजह बजट में अमीरों पर टैक्स में बढ़ोतरी को बताया जा रहा है. बजट में साल में दो से पांच करोड़ रुपये कमाने वालों पर सरचार्ज बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया है. सालाना पांच करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर इसे 37 फीसदी कर दिया गया है. इसकी चपेट में शेयर बाजार के विदेशी निवेशक भी आ रहे हैं.

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बजट में सुपर रिच टैक्स के प्रावधान के अलावा भी कुछ चीजें हैं जो शेयर बाजार को पसंद नहीं आ रही हैं. जैसे इसमें प्रावधान है कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध यानी लिस्टेड कंपनियों को अपनी पब्लिक होल्डिंग 25 से बढ़ाकर 35 फीसदी करनी होगी. यानी कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध हर कंपनी को हर हाल में अपने 35 फीसदी शेयर आम निवेशकों को बेचने पड़ेंगे.

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देश के शेयर बाजारों में लगभग 4700 कंपनियां लिस्टेड हैं. इनमें 25 फीसदी ऐसी हैं, जिनके मालिकों के पास अपनी कंपनियों के 65 फीसदी से ज्यादा शेयर हैं. नए प्रावधानों के चलते उन्हें अपने शेयरों की बिकवाली आम निवेशकों को करनी होगी. ऐसे में करीब चार लाख करोड़ की कीमत के शेयर बाजार में आएंगे. अगर मांग और पूर्ति के सामान्य सिद्धांत की नजर से भी देखें तो बाजार में ज्यादा मात्रा में शेयर उपलब्ध होने से उनके दाम गिरेंगे. इसका सीधा असर शेयर बाजार के सूचकांक पर होगा.

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शेयर बाजार ‘सेंटीमेंट्स’ पर चलते हैं. विदेशी निवेशक और बाजार के जानकार बिकवाली शुरू करते हैं तो तकनीकी चीजों पर ध्यान न देने वाला आम निवेशक भी अपना पैसा निकालना शुरू कर देता है. भारतीय शेयर बाजारों के साथ ऐसा ही हो रहा है.

  • मोहन भागवत

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