संतोष बीएल

विचार और रिपोर्ट | राजनीति

भाजपा में संगठन महामंत्री के तौर पर बीएल संतोष की नियुक्ति के क्या मायने हैं?

भाजपा में संगठन के स्तर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद संगठन महामंत्री का माना जाता है

ब्यूरो | 15 जुलाई 2019 | फोटो: फेसबुक/संतोष बीएल

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भारतीय जनता पार्टी में संगठन महामंत्री के तौर पर बीएल संतोष की नियुक्ति ने न सिर्फ राजनीतिक जानकारों को बल्कि भाजपा नेताओं को भी हैरान किया. बीते दिनों पिछले 13 साल से इस पद पर रहे रामलाल को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वापस बुलाने का निर्णय लिया था. इसके बाद से ही इस पद पर नियुत्ति को लेकर कई नामों की चर्चा चल रही थी.

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भाजपा में संगठन के स्तर पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद सबसे महत्वपूर्ण पद संगठन महामंत्री का माना जाता है. इस पद पर उन्हीं संघ प्रचारकों में किसी की नियुक्ति होती है जिसे संघ खुद भाजपा में भेजता है. रामलाल से पहले इस पद पर केएन गोविंदाचार्य और संजय जोशी जैसे दिग्गज काम कर चुके हैं. संगठन महामंत्री भाजपा और संघ के बीच सबसे प्रमुख कड़ी के तौर पर काम करते हैं.

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रामलाल के हटने की स्थिति में सह-संगठन मंत्री वी सतीश के नाम को लेकर काफी चर्चा थी. लेकिन अंतिम बाजी बीएल संतोष के हाथ लगी. बीएल संतोष को यह जिम्मेदारी मिलने की कई वजहें बताई जा रही हैं. सबसे पहली वजह तो यह बताई जा रही है कि बीएल संतोष कर्नाटक के हैं. भाजपा को लगता है कि उन्हें इस अहम पद पर बैठाकर पार्टी दक्षिण भारत में अपने विस्तार की योजना को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकती है. इसके पहले भी सह-संगठन मंत्री के तौर पर वे दक्षिण भारतीय राज्यों का ही काम देख रहे थे.

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उनके पक्ष में दूसरी बात यह गई कि वे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के विश्वस्त हैं. शाह ही उन्हें 2014 में कर्नाटक से सह-संगठन मंत्री बनाकर दिल्ली लाए थे. बीएल संतोष को यह जिम्मेदारी मिलने की तीसरी वजह ये है कि वे आक्रामक ढंग से हिंदुत्व के मुद्दों को उठाते रहे हैं. नरेंद्र मोदी और अमित शाह की शैली भी यही है.

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चुनाव प्रबंधन के मामले में भी बीएल संतोष को माहिर माना जाता है. यह बात भी उनके पक्ष में गई. भाजपा के अंदर हर स्तर पर जिस तरह से नई पीढ़ी के लोगों को लाया जा रहा है, उस वजह से भी किसी पुराने नेता पर बीएल संतोष को तरजीह देकर पार्टी ने उन्हें संगठन महामंत्री बनाया है.

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