ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी

विचार और रिपोर्ट | विदेश

अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ने की कितनी संभावना है?

बीते एक महीने के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिससे इन दोनों के बीच जंग जैसे हालात बन गए हैं

ब्यूरो | 26 जून 2019 | फोटो : ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय

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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. बीते साल अमेरिका ने 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था और उस पर कई प्रतिबंध भी लगा दिए थे. लेकिन फिर भी ईरान नये समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ. इससे नाराज होकर अमेरिका ने उसके आसपास बमवर्षक विमानों की तैनाती कर दी है. उसने ईरान के खतरे को देखते हुए इराक के अपने दूतावास के कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया है. उधर, ईरान ने भी अब 2015 के परमाणु समझौते की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है.

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अमेरिका और ईरान के बीच बीते एक महीने में जो कुछ भी हुआ है उसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इनके बीच जल्द ही जंग छिड़ने वाली है? अमेरिकी जानकार कहते हैं कि इस सवाल का जवाब जानने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के पीछे क्यों पड़े हुए हैं. इन जानकारों के मुताबिक ट्रंप ने पिछले राष्ट्रपति चुनाव में वादा किया था कि वे ओबामा प्रशासन द्वारा किये गये परमाणु समझौते को खत्म कर देंगे और ईरान के साथ नया समझौता करेंगे. ट्रंप के मुताबिक वर्तमान समझौते में ईरान को बहुत ज्यादा सहूलियत दी गयी है जो सही नहीं है.

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लेकिन, इस मामले में गौर करने वाली बात ये है कि भले ही लोगों ने ट्रंप को इस वादे की वजह से वोट दे दिया हो. लेकिन, वे ये बिलकुल नहीं चाहते कि ईरान पर हमला किया जाए. जानकार मानते हैं कि इस समय ट्रंप ईरान पर हमला कर अपने देशवासियों की नाराजगी मोल नहीं लेंगे. क्योंकि अगले साल ही उन्हें फिर से चुनावी मैदान में उतरना है.

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अमेरिका के ईरान पर हमला न करने की एक वजह उसके अकेले पड़ जाने का डर भी है. विशेषज्ञों की मानें तो इराक और अफगानिस्तान पर जब अमेरिका ने हमला किया था तब उसके पास ऐसा करने की बड़ी वजहें थीं. लेकिन ईरान पर हमला हुआ तो वो डोनाल्ड ट्रंप की जिद की वजह से होगा. क्योंकि परमाणु समझौते का हिस्सा रहे सभी देशों का कहना है कि ये समझौता सही था और ईरान इसकी सभी शर्तों का पालन कर रहा है.

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लेकिन ये भी सच है कि आज दोनों देश युद्ध की देहरी पर खड़े हैं और ऐसे में एक छोटी सी चिंगारी भी लड़ाई शुरू करवा सकती है. अमेरिकी पत्रकार हीदर हर्लबर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप अगर अपने एनएसए जॉन बोल्टन की बातों में आ गए तो युद्ध संभव है. इसके अलावा जब से अमेरिका ने ईरान की सेना को आतंकी संगठन घोषित किया है तब से इराक में अमेरिकी और ईरानी सैनिकों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है. अगर ऐसा कुछ होता है तो फिर अमेरिका ईरान पर हमला जरूर करेगा.

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