ईरान हॉर्मुज

विचार और रिपोर्ट | विदेश

ईरान अमेरिका से सुलह करने के बजाय टकराव पर क्यों तुला है?

तेलवाहक जहाजों पर हमले के बाद से ईरान लगातार अमेरिका को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है

ब्यूरो | 22 जुलाई 2019 | फोटो : पीबीएस डॉट ओआरजी

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बीते साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते से अलग होकर उस पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए. डोनाल्ड ट्रंप का कहना था कि वह ईरान पर इतना दवाब बना देंगे की वह उनके सामने घुटने टेकने के लिए मजबूर हो जाएगा. इसके बाद से वे लगातार ये प्रतिबंध कड़े करते गए. लेकिन बीते एक महीने में ईरान ने इस मामले पर जो रुख अपनाया है उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है.

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ईरान ने कथित रूप से मध्यपूर्व के हॉर्मुज जल संधि क्षेत्र में छह तेलवाहक विमानों पर हमले किए. उसने इसी क्षेत्र में अमेरिका के एक निगरानी ड्रोन-विमान को मार गिराया. इसके अलावा तमाम चेतावनियों के बाद भी उसने 2015 के परमाणु समझौते की सबसे बड़ी शर्त तोड़ दी और तय सीमा से ज्यादा यूरेनियम को संवर्धित करना शुरू कर दिया.

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दुनियाभर के जानकार ईरान के इस आक्रामक रुख की कई वजहें बताते हैं. इनके मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप इस समय ईरान के खिलाफ वास्तव में युद्ध नहीं छेड़ना चाहते. इसकी पहली वजह अमेरिकी संसद और वहां के लोगों का युद्ध के पूरी तरह खिलाफ होना है. अमेरिका के ईरान पर हमला न करने की एक वजह उसके अकेले पड़ जाने का डर भी है. विशेषज्ञों की मानें तो इराक और अफगानिस्तान पर जब अमेरिका ने हमला किया था तब उसके पास ऐसा करने की बड़ी वजहें थीं. लेकिन ईरान पर हमला हुआ तो वो डोनाल्ड ट्रंप की जिद की वजह से होगा.

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जानकार कहते हैं कि ईरान ये सभी बाते अच्छे से जानता है, लेकिन उसे यह भी पता है कि ट्रंप लगातार उसके खिलाफ प्रतिबंधों को कड़ा करते रहेंगे. ऐसे में वह अमेरिका के खिलाफ उसकी ही नीति अपना रहा है. वह भी अमेरिकी राष्ट्रपति पर दबाव बनाकर उन्हें 2015 में हुए समझौते पर ही तैयार होने को मजबूर करना चाहता है.

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जानकार कहते हैं कि ईरान के पास अमेरिका पर दवाब बनाने के लिए हॉर्मुज जल संधि क्षेत्र से बेहतर विकल्प नहीं हो सकता. मध्यपूर्व से दुनिया भर में तेल और गैस का निर्यात इसी रास्ते से होता है. यही वजह थी कि जब छह तेल टैंकरों पर मिसाइल से हमले हुए तो इससे पूरी दुनिया पर दबाव बढ़ा. इसके बाद सऊदी अरब के साथ-साथ तमाम यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका पर शांति के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया.

  • मोहन भागवत

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