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ज्ञानकारी | तकनीक

मोबाइल फोन के नए टाइम लिमिट फीचर से जुड़ी पांच बातें

एपल के 'स्क्रीन टाइम' और गूगल के 'डिजिटल वेलबीइंग' की मदद से यूजर मोबाइल इस्तेमाल को मॉनीटर कर सकेंगे

ब्यूरो | 07 अप्रैल 2019 | फोटो: पिक्साबे

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सितंबर-2018 में एपल ने आईओएस-12  के साथ एक नया फीचर, स्क्रीन टाइम भी लॉन्च किया था जो इस बात की मॉनीटरिंग करता है कि कोई य़ूजर अपने फोन के साथ कितना और कैसे वक्त बिता रहा है. इसी तरह गूगल भी डिजिटल वेलबीइंग नाम का एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है जो एंड्रायड के पाई-अपडेट के साथ उपलब्ध होगा. डिजिटल वेलबीइंग की खासियत है कि यह स्क्रीन का रंग बदलकर या कुछ ऐप्स को थोड़े समय के लिए ब्लॉक कर, मोबाइल फोन के बेजा इस्तेमाल की आदत को छुड़ाने में मदद करेगा. इसके अलावा इनका इस्तेमाल पैंरेटल कंट्रोल सिस्टम की तरह भी किया जा सकता है.

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इन फीचर्स को कुछ इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये यूजर द्वारा मोबाइल इस्तेमाल करने के समय को नहीं बल्कि तरीके को मॉनीटर करते हैं. यानी कि अगर यूजर कोई किताब पढ़ रहा है या किसी से चैट कर रहा हैं तो ये उसे डिस्टर्ब नहीं करेंगे लेकिन अगर वह फेसबुक-इंस्टाग्राम स्क्रोलिंग कर रहा है तो स्क्रीन पर चेतावनी वाला संदेश दिखाई देने लगेगा.

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स्क्रीन टाइम और डिजिटल वेलबीइंग में टाइम ट्रैकर है जो यह बताएगा कि यूजर अपना फोन दिन में कितनी बार छूता है. इसके अलावा किस ऐप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करता है या किस ऐप के नोटिफिकेशन सबसे ज्यादा उसके काम में बाधा डालते हैं. इस जानकारी का इस्तेमाल कर यूजर मोबाइल के इस्तेमाल की आदत में अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव ला सकता है.

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एक बार यह पता चलने के बाद स्क्रीन टाइम की मदद से यूजर अपने आईफोन या आईपैड पर हर ऐप के लिए टाइम लिमिट सेट कर सकता है. इसके बाद स्क्रीन समय खत्म होने का मैसेज आ जाएगा, इसके बाद यूजर चाहे तो पंद्रह मिनट के लिए इसे स्नूज़ कर सकता है या पूरी तरह से नज़रअंदाज कर सकता है. दूसरी तरफ डिजिटल वेलबीइंग, जरा सख्त रवैया अपनाते हुए निर्धारित टाइम लिमिट खत्म होने के बाद उस ऐप को लॉक कर देता है. ऐसे में होम स्क्रीन पर भी उस ऐप का आइकन ग्रे-कलर का दिखाई देना शुरू हो जाएगा. इसके बाद भी अगर यूजर उस ऐप का इस्तेमाल करना चाहता है तो उसे सेटिंग में जाकर टाइमर बंद करना होगा.

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मोबाइल फोन पर जुड़े तमाम शोध रात में इसके इस्तेमाल से बचने की बात कहते हैं, इसे ध्यान में रखकर स्क्रीन टाइम और डिजिटल वेलबीइंग में ‘क्वाइट ऑर्स’ का विकल्प भी दिया गया है. क्वाइट ऑर्स में भी फोन का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इस दौरान ऐप्स के कुछ चुनिंदा नोटिफिकेशन ही मिलेंगे और बार-बार फोन रखने का संदेश मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगा. एपल ने जहां क्वाइट ऑर्स में कुछ चुनिंदा ऐप्स के अलावा बाकी सभी को ब्लॉक करने का विकल्प दिया है वहीं गूगल इस समय फोन को डू नॉट डिस्टर्ब मोड पर करने की सुविधा देता है. यहां पर केवल कुछ बेहद जरूरी कॉल और मैसेज के लिए सेटिंग चालू रखी जा सकती है.

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर आधारित

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