ऑस्कर अवॉर्ड, एआर रहमान

ज्ञानकारी | सिनेमा

पांच तथ्य जो ऑस्कर लेडी के बनने की कहानी बताते हैं

25 फरवरी को लॉस एंजेल्स में 91वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया

ब्यूरो | 25 फरवरी 2019 | फोटो: ट्विटर-एआर रहमान

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ऑस्कर अवार्ड को पाना फिल्मी दुनिया से जुड़े हर कलाकार का सपना होता है. इसकी शुरुआत 1929 में हुई थी. अवार्ड विजेता को ऑस्‍कर की ट्रॉफी दी जाती है जिसे गोल्‍डन लेडी या ऑस्कर लेडी भी कहा जाता है.

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ऑस्कर लेडी 13.5 इंच लंबी होती है और इसका वज़न 3.85 किलो होता है. इसकी आकृति एक योद्धा की है जो तलवार लिए हुए है और पांच तीलियों वाली एक फिल्म रील पर खड़ा है. ये पांच तीलियां सिनेमा के अभिनय, निर्देशन, निर्माण, तकनीकी टीम और लेखन जैसे पांच मूलभूत हिस्सों को दिखाते हैं.

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हर ऑस्कर ट्रॉफ़ी को बनाने में लगभग 400 डॉलर यानी करीब 26 हजार रुपए का खर्च आता है. इसे बनाने में स्टील मिश्रित ब्रिटेनियम का इस्तेमाल होता है. और इस पर 24 कैरेट सोने की परत भी लगाई जाती है. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान धातु की कमी होने के चलते, तीन साल तक प्लास्टर की बनी मूर्तियों को सुनहरे रंग से रंगकर बंटा गया.

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हर साल लगभग 50 ऑस्कर ट्रॉफियां शिकागो के इलिनोइ में आरएस ओवन्स एंड कंपनी द्वारा बनाई जाती हैं. साल 1983 में पहली बार इस कंपनी से अनुबंध किया गया था.

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1950 में अकैडमी ऑफ मोशन पिक्चर्स एंड साइंसेज ने ऑस्कर जीतने वालों के साथ एक अनुबंध करना भी शुरू किया जिसके अनुसार ऑस्कर ट्रॉफी को बेचा नहीं जा सकता है.

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