बोगीबील पुल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

ज्ञानकारी | असम

बोगीबील पुल से जुड़ी पांच अहम बातें जो आपको जाननी चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में देश के सबसे लंबे डबलडेकर पुल बोगीबील का उद्घाटन किया

ब्यूरो | 25 दिसंबर 2018 | फोटो: पीआईबी

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यह एक डबलडेकर पुल है जिसके निचले हिस्से में ट्रेनों के गुजरने के लिए दो लेन का रेलवे ट्रैक है. ऊपरी हिस्से पर वाहनों की आवाजाही के लिए तीन लेन की सड़क बनाई गई है. इस तरह का यह एशिया का दूसरा सबसे लंबा पुल है.

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बोगीबील पुल पूर्वोत्तर में बुनियादी ढांचे के विकास में मील का पत्थर है. ब्रह्मपुत्र नदी पर 4.94 किलोमीटर लंबे इस पुल की सेवाएं शुरू होने से असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच यात्रा के वक्त में चार घंटे की कमी आई है. बोगीबील पुल ने दिल्ली से डिब्रूगढ़ की दूरी भी तीन घंटे घटा दी है.

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इस पुल का शिलान्यास 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने किया था. लेकिन निर्माण कार्य गंभीरता से 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान शुरू हुआ. 5920 करोड़ रु की लागत से बना यह पुल 120 साल तक सेवाएं देगा.

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विशाल ब्रह्मपुत्र से 32 मीटर की ऊंचाई पर बना बोगीबील पुल भारत के लिए सामरिक लिहाज से भी बेहद अहम है. अब भारत-चीन सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों तक पहले के मुकाबले कहीं कम समय में सैन्य साजो-सामान पहुंचाया जा सकेगा. यह पुल इतना इतना मजबूत है कि इस पर सैन्य टैंकों को भी दौड़ाते हुए एक से दूसरे छोर तक ले जाया जा सकता है.

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बोगीबील पुल का निर्माण भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं का भी शानदार उदाहरण है. भूगर्भीय रूप से संवेदनशील इस इलाके में इतना विशाल पुल बनाना बहुत बड़ी चुनौती थी. लेकिन भारतीय इंजीनियरों ने यह कमाल कर दिखाया. भारत का यह पहला पुल है जिसकी वेल्डिंग यूरोपीय मानकों को पूरा करती है.

(द टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट पर आधारित)

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