ब्लैक होल की पहली असली तस्वीर

ज्ञानकारी | विज्ञान

ब्लैक होल की पहली असली तस्वीर से जुड़े पांच सवाल

ब्लैक होल को अंतरिक्ष के सबसे बड़े रहस्यों में से एक माना जाता है. हाल ही में इसकी पहली असली तस्वीर जारी की गई है

ब्यूरो | 11 अप्रैल 2019 | फोटो: यूरोपियन साउदर्न ऑब्जरवेटरी

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ब्लैक होल की यह तस्वीर क्यों खास है?

इस तस्वीर से एक बड़े ब्लैक होल के अस्तित्व का पता चलता है. यह ब्लैक होल मेसिअर-87 (एम-87) नामक आकाशगंगा में स्थित है और धरती से क़रीब 55 करोड़ प्रकाशवर्ष दूर है. इससे पहले ली गई तस्वीरों में केवल ब्लैक होल के होने का अंदाजा लगता था, कोई स्पष्ट तस्वीर नहीं बनती थी.

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ब्लैक होल की यह तस्वीर किस तरह ली गई?

इवेंट होराइज़न टेलिस्कोप (ईएचटी) से ब्लैक होल की पहली सीधी तस्वीर लेना संभव हुआ है. ईएचटी असल में दुनिया भर में फैले टेलिस्कोप का एक नेटवर्क है. इसे धरती के आकार का एक विशालकाय वर्चुअल टेलिस्कोप भी कह सकते हैं.

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यह ब्लैक होल कितना बड़ा है?

एम-87 सूर्य से 700 करोड़ गुना बड़ा है और इसकी चौड़ाई करीब दस हजार करोड़ किलोमीटर है. चौड़ाई का यह आंकड़ा, सूर्य से वरुण ग्रह की दूरी का लगभग 22 गुना है. यानी यह कहा जा सकता है कि यह ब्लैक होल हमारे सोलर सिस्टम को बहुत आसानी से निगलना की क्षमता रखता है.

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अगर ब्लैक होल में प्रकाश किरणें भी नहीं जा सकतीं तो इसकी तस्वीर लेना कैसे संभव हुआ?

असल में ब्लैक होल की इस तस्वीर को एक तरह का सिल्यूएट यानी छायाचित्र कहा जा सकता है. इसके आस-पास चमकीले रंग का कोई पदार्थ घूम रहा है जिसके कारण ब्लैक होल वाला हिस्सा अंधेरे से भरा दिखता है और इसकी आकृति का पता चलता है.

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ब्लैक होल के एक तरफ का हिस्सा ज्यादा चमकदार क्यों है?

ब्लैक होल और इसके आस-पास के पिंड लगातार गतिमान हैं. इस कारण जब जिस हिस्से का प्रकाश धरती की तरफ आता है, वह चमकीला दिखता है और जहां से प्रकाश किरणें दूसरी दिशा में जाती हैं, वह धुंधला नज़र आता है.

न्यू साइंटिस्ट की इस रिपोर्ट पर आधारित.

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