इंदिरा गांधी

ज्ञानकारी | साहित्य

एशियाई राजनेत्रिओं का जीवन बताती वे किताबें जो भीतर से मजबूत बनने को प्रेरित करती हैं

आंग सान सू की | फ़ौज़िया कूफी | बेनज़ीर भुट्टो | इंदिरा गांधी | सिरिमावो भंडारनाइके

ब्यूरो | 10 जून 2019 | फोटो: फ्लिकर

1

फ़्रीडम फ़्रॉम फिअर: एंड अदर राइटिंग्स (आंग सान सू की)

यह किताब मानवाधिकार कार्यकर्ता और राजनेता आंग सान सू की के निबंधों और भाषणों का संकलन है. 15 साल अपने ही घर में नज़रबंद रहने वाली सू की के संघर्ष, उनके डरों और उम्मीदों का ख़ाका खींचती यह किताब एक एशियाई महिला की हिम्मत और मजबूत जज़्बे की कहानी भी है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस किताब के बारे में लिखा था कि ‘यह किताब एशिया की उस नई पीढ़ी के लिए क्लासिक बनने जा रही है जो पश्चिमी नागरिकों से ज़्यादा लोकतंत्र में यकीन रखते हैं. इसलिए कि उनके पास वह आधारभूत आज़ादी नहीं है, जिसे हम महत्वहीन समझने लगते हैं.’

2

द फेवर्ड डॉटर: वन वूमन्स फाइट टू लीड अफ़ग़ानिस्तान इनटू द फ्यूचर (फ़ौज़िया कूफी)

अफ़ग़ानिस्तान की संसद में बोलने वाली पहली महिला सांसद फौज़िया कूफी की कहानी बाकी एशियाई राजनेत्रियों से अलग है. कूफी किसी समृद्ध और प्रभावशाली परिवार से होने की बजाय एक गांव के मुखिया की 19वीं बेटी हैं, जिसे पैदा होने के बाद मरने के लिए धूप में छोड़ दिया गया. इस किताब में उन्होंने अपने परिवार की नाइंसाफियों से लेकर रूसी और तालिबानी हुकूमतों के शोषण तक के कई किस्से लिखे हैं. साथ ही वे इन सबको पीछे छोड़ने की अपनी कोशिशों का जिक्र भी तफ्सील से करती हैं. इसके अलावा वे अपनी बेटियों और उनके जैसे तमाम अफ़ग़ान बच्चों के बेहतर भविष्य के उन सपनों बारे में लिखती हैं, जिन्हें उनके पिता, भाई और पति की हत्या और उनके खुद के ऊपर हुए जानलेवा हमले भी नहीं तोड़ सके हैं.

3

मेरी आपबीती (बेनज़ीर भुट्टो)

पाकिस्तान की ग्यारहवीं प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की यह आत्मकथा उनके सुरक्षित और समृद्ध बचपन की कहानियों से लेकर उनके देश की अस्थिर राजनीति के शिखर तक पहुंचने की दास्तान है. अपनी किताब में वे पूरी निडरता से अपने निर्वासन, वतन और राजनीति में वापसी, ज़िया उल हक़ की रहस्यमयी मौत और निष्पक्ष चुनाव कराने के अपनी पार्टी के संघर्ष के बारे में लिखती हैं. हालांकि इस किताब पर इसे ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान से लिखे जाने के आरोप लगते रहे हैं. इसके बावजूद पाकिस्तान जैसे अराजक मुल्क की अगुवाई करने वाली बेनज़ीर की कहानी बहुत प्रभावित करती है.

4

माइ ट्रूथ (इंदिरा गांधी)

माय ट्रुथ भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंधिरा गांधी के साक्षात्कारों व अन्य सामग्रियों पर आधारित है. यह किताब उनके बचपन के क़िस्सों से लेकर देश की सबसे ताकतवर महिला बनने तक की यात्रा तय करती है. एक मजबूत महिला जिसे न सिर्फ पाकिस्तान के विभाजन का श्रेय मिलता है बल्कि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) जैसे संस्थान को खड़ा करने की दूरदर्शिता भी उसके नाम है. उनकी हत्या से दो साल पहले प्रकाशित हुई यह किताब बताती है कि एक प्रभावशाली परिवार में पैदा होने और देश के पहले प्रधानमंत्री की पुत्री होने के बाद भी प्रियदर्शिनी का इंदिरा बनना इसलिए संभव हो सका क्योंकि उनके इरादे लोहे के थे और नज़र ऊंचाई पर.

5

सिरिमावो भंडारनाइके (मालागोडा बंदुथिलाका)

सिरिमावो भंडारनाइके एक देश की मुखिया बनने वाली दुनिया की पहली महिला थीं. उनके पति एसडब्ल्यूआरडी भंडारनाइके श्रीलंका की आज़ादी के छह साल बाद, 1956 में देश के चौथे प्रधानमंत्री बने थे. 1959 में उनकी हत्या कर दिए जाने के बाद सिरिमावो भंडारनायके ने श्रीलंका फ़्रीडम पार्टी का नेतृत्व संभाला. 1960 के आम चुनावों के बाद वे प्रधानमंत्री चुनीं गईं और दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री होने का इतिहास बनाया. इसके बाद 1970 में सात साल के लिए और 1994 में छह साल के लिए वे दो बार और इस कुर्सी के लिए चुनी गईं. आज़ादी के तुरंत बाद एक छोटे से देश की महिला की ये चौंका देने वाली कहानी भंडारनाइके ने खुद तो नहीं लिखी, लेकिन फिर भी प्रेरणा देने वाली तो है ही.

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