बेटी जीवा के साथ महेंद्र सिंह धोनी

ज्ञानकारी | समाज

बेटियां, पापा की परी और बेटे, मां के लाडले क्यों कहे जाते हैं?

फिल्में और अफसाने कुछ भी कहें लेकिन मनोविज्ञान कहता है कि मांएं, बेटियों को और पिता, बेटों को ज्यादा अच्छे से समझते हैं.

ब्यूरो | 10 दिसंबर 2018

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पहली बात तो यह है कि अपने ही लिंग के बच्चे को समझने के पीछे अभिभावकों का अनुभव काम करता है. माता या पिता ने एक लड़की या लड़के के रूप में एक लंबा जीवन जिया होता है इसलिए वे किसी परिस्थिति विशेष में अपने ही लिंग के बच्चे का मनोविज्ञान भली तरह से समझते हैं और उसकी मनोदशा का अंदाजा ज्यादा अच्छे से लगा पाते हैं. यही वजह है कि अपनी जिद या कम जरूरी जरूरत पूरी करवाने में बच्चों के काम अक्सर विपरीत लिंग का अभिभावक आता है और ऐसा कई बार होने वे उनके लाडले कहे जाने लगते हैं.

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भारतीय समाज के नजरिए से देखें तो यहां एक सामाजिक मज़बूरी भी नजर आ सकती है. बेटी चूंकि लड़की है, कमजोर है और उसे सुरक्षा की दरकार है, इसलिए चाहे-अनचाहे भी उसे पिता की बेटी होना पड़ेगा. पिता को भी बेटे की तुलना में बेटी की सुरक्षा का ज्यादा ख्याल और देखभाल करनी होती है. मां-बेटे के मामले में यह चीज बिलकुल उलटी हो जाती है. मां भी एक महिला है, उसके लिए बड़ा हो रहा/हो चुका बेटा (पति के बाद) सहारा होता है. वह घर के भारी कामों में उसकी मदद कर सकता है या बाहर आने-जाने में उसके साथ जा सकता है. यह भी बाप-बेटी या मां-बेटे की जोड़ी के साथ में दिखाई देने के कारणों में से एक है.

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प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्रॉयड ने किसी मनुष्य की यौन चेतना से संबंधित मानसिक विकास के पांच चरण बताए हैं. ये बच्चे के जन्म से लेकर किशोरावस्था तक की विकास प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं. तीन से छह साल का बच्चा इस विकास चरण के तीसरे हिस्से में होता है, जिसे लैंगिक चरण कहते हैं. इसी चरण में बच्चा अलग-अलग लिंग के लोगों में अंतर करना और उनमें रूचि लेना शुरू करता है.

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बेटे के मां की तरफ और बेटी का पिता की तरफ झुकाव भी इसी उम्र में होता है. इसे क्रमश इडिपस कॉम्प्लेक्स और इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स कहा जाता है.  फ्रॉयड के अनुसार इडिपस (या इलेक्ट्रा) कॉम्प्लेक्स एक बच्चे की सहज इच्छा है जिसमें वह विपरीत लिंग के अभिभावक की तरफ आकर्षित होता है. यह एक तरह का यौन आकर्षण ही है. इस दौरान बच्चे के अवचेतन में यौन इच्छाएं पैदा होना शुरू होती हैं जो उसके सही शारीरिक-मानसिक विकास के लिए जरूरी होती हैं.

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फ्रॉयड स्पष्ट करते हैं कि इस उम्र में मनुष्य का मस्तिष्क लगातार इन इच्छाओं का दमन कर रहा होता है. इसलिए यह इच्छा वयस्कों की तरह कभी स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं की जा सकतीं. दरअसल यह प्रक्रिया दिमाग के अवचेतन हिस्से में चलती है और यह अवचेतन मस्तिष्क भी उस समय तक अल्पविकसित ही होता है. इस तरह मनोविज्ञान के मुताबिक बेटी पिता को और बेटा मां को अगर ज्यादा पसंद करता है तो ऐसा करने की मुख्य वजह इडिपस और इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स है.

सत्याग्रह की रिपोर्ट पर आधारित

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