नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करते पूर्वोत्तर राज्यों के लोग

ज्ञानकारी | कानून

नागरिकता संशोधन विधेयक से जुड़ी पांच बातें जो आपको जाननी चाहिए

बीते मंगलवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 पारित हो गया है और असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में इसका विरोध किया जा रहा है

ब्यूरो | 12 जनवरी 2018 | फोटो: अर्पिता दत्ता-ट्विटर

यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के मकसद से लाया गया है. इसके अमल में आने के बाद वे भारत आने पर 12 के बजाय छह साल बाद ही नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा अगर असम की बात करें तो 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे. लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है.

यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के मकसद से लाया गया है. इसके अमल में आने के बाद वे भारत आने पर 12 के बजाय छह साल बाद ही नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा अगर असम की बात करें तो 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे. लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है.

यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के मकसद से लाया गया है. इसके अमल में आने के बाद वे भारत आने पर 12 के बजाय छह साल बाद ही नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा अगर असम की बात करें तो 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे. लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है. लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है.

यह विधेयक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले गैरमुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता आसान बनाने के मकसद से लाया गया है. इसके अमल में आने के बाद वे भारत आने पर 12 के बजाय छह साल बाद ही नागरिकता हासिल कर सकते हैं. इसके अलावा अगर असम की बात करें तो 1985 के असम समझौते के मुताबिक 24 मार्च 1971 से पहले राज्य में आए प्रवासी ही भारतीय नागरिकता के पात्र थे. लेकिन नागरिकता (संशोधन) विधेयक में यह तारीख 31 दिसंबर 2014 कर दी गई है.

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