इंडोर प्लांट्स

ज्ञानकारी | पर्यावरण

क्यों इंडोर प्लांट्स प्रदूषण से बचने का उपाय नहीं है

दुनिया भर में ऐसा माना जाता है कि इंडोर प्लांट्स घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ-साथ भीतर मौजूद प्रदूषण को भी कम करते हैं

ब्यूरो | 20 दिसंबर 2018 | फोटो: पिक्साबे

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हो सकता है, आपको यह सुनकर झटका लगे कि इंडोर प्लांट्स हवा को शुद्ध करने में कोई खास भूमिका नहीं निभाते हैं! बीते कुछ सालों से भारत में शुरू हुआ इंडोर प्लांट्स का चलन पश्चिम से यहां पहुंचा है. दरअसल, पश्चिमी देशों में कड़ाके की सर्दियां शुरू होते ही ज्यादातर घर एयरटाइट डिब्बों में बदल जाते हैं और ऐसे में घर की हवा को साफ-सुथरा रखने के सस्ते उपाय के तौर पर इन पौधों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यह केवल एक मिथक है!

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इंडोर प्लांट्स से जुड़े इस मिथक की शुरूआत सन 1989 में जारी नासा के एक शोध पत्र से हुई. ऐसा नहीं है कि इस पत्र में कोई गलत जानकारी दी गई थी. दरअसल, इसे रिपोर्ट करने वाले ज्यादातर पत्रकारों ने इसे बारीकी से पढ़ने की बजाय ऊपर-ऊपर से समझ में आई जानकारी के आधार पर इंडोर प्लांट्स के तमाम फायदे गिनवा दिए.

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इस रिपोर्ट के आधार पर बताया गया कि इंडोर प्लांट्स कमरे में मौजूद 90 प्रतिशत प्रदूषकों को, मात्र 24 घंटे में खत्म कर देते हैं और लगभग 100 वर्ग फीट एरिया में हवा की सफाई के लिए केवल एक ही पौधा काफी है.  लेकिन यह नहीं बताया गया कि वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष आदर्श परिस्थितियों किए गए प्रयोगों के आधार पर निकाला था.

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नासा की इस रिपोर्ट में एक्टिवेटेड कार्बन प्लांट फिल्टर का जिक्र किया गया है. एक्टिवेटेड कार्बन यानी चारकोल में प्रयोग के लिए उगाए गए पौधों को, एक्टिवेटेड कार्बन प्लांट फिल्टर कहा जाता है. इन्हें छोटे-छोटे चैंबरों में रखकर यह परीक्षण किया गया था. इसके अगले चरण में पौधों की पत्तियां हटाकर प्रयोग किया गया जिसके आधार पर यह भी बताया गया कि ये पौधे नहीं बल्कि चारकोल था जो प्रदूषण को कम कर रहा था. लेकिन इस तथ्य को ज्यादातर पत्रकारों ने नजरअंदाज कर दिया.

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ज्यादातर वैज्ञानिक मानते हैं कि किसी कमरे में जहां हर वक्त प्रदूषकों की मात्रा बदलती रहती है, वहां इस तरह की परिस्थितियां बना पाना और हवा को एकदम साफ कर पाना लगभग नामुमकिन है. हालांकि वे इस बात से इंकार नहीं करते कि इन पौधों की उपस्थिति कमरे में थोड़ी मात्रा में ऑक्सीजन बढ़ाने में मददगार होती है लेकिन उनसे वातावरण में कोई महसूस किया जा सकने वाला फर्क आ जाए, ऐसा संभव नहीं है.

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