कोरोना वायरस वैक्सीन

ज्ञानकारी | कोरोना वायरस

सरकार ने कोवीशील्ड के पहले और दूसरे डोज के बीच का समय बढ़ाने का फैसला क्यों किया है?

कोवीशील्ड का दूसरा डोज अभी तक चार से छह हफ्ते के बीच लग रहा था. इस अवधि को अब चार से आठ हफ्ते कर दिया गया है

ब्यूरो | 25 मार्च 2021 | फोटो: पिक्साबे

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भारत सरकार ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए लगाई जा रही वैक्सीन कोवीशील्ड के पहले और दूसरे डोज के बीच का समय बढ़ाने का फैसला किया है. पहले यह चार से छह हफ्ते तक था जिसे अब बढ़ाकर चार से आठ हफ्ते तक कर दिया गया है. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक चिट्ठी लिखकर इस नए निर्देश पर अमल सुनिश्चित करने को कहा है. कोरोना वायरस से उपजी महामारी यानी कोविड-19 से सुरक्षा के लिए भारत में 16 जनवरी 2010 से वैक्सीनेशन यानी टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था. तब से अब तक करीब पांच करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है.

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भारत में फिलहाल दो वैक्सीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहली है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका द्वारा विकसित की गई वैक्सीन जिसे कोवीशील्ड के नाम से भारत में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया बना रही है. दूसरी कोवैक्सीन है जिसे भारत में ही भारत बायोटेक इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी ने नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलजी के साथ मिलकर तैयार किया है. इस साल की शुरुआत में ही दवा नियंत्रक ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने आपात स्थितियों के आधार पर इन दोनों वैक्सीनों के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. हालांकि दो डोजेज के अंतराल का दायरा बढ़ाने का फैसला सिर्फ कोवीशील्ड के लिए लिया गया है.

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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोवीशील्ड की दो खुराकों के बीच के अंतराल को बढ़ाने का फैसला विशेषज्ञों के दो समूहों की सिफारिश के बाद लिया. इनमें पहला समूह था द नेशनल टेक्निकल एडवायजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) और दूसरा, नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड-19 (एनईजीवीएसी). इन दोनों समूहों ने वैक्सीन के परीक्षणों से मिले वैज्ञानिक डेटा का अध्ययन किया था. इससे उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि अगर वैक्सीन की दूसरी खुराक छह से आठ हफ्ते के बीच लगाई जाई तो इससे मिलने वाली सुरक्षा बढ़ जाती है.

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बीते फरवरी में हुए एक अध्ययन में यह भी पाया गया था कि जब वैक्सीन का दूसरा डोज छह हफ्ते के भीतर दिया गया तो यह 54.9 फीसदी असरकारी रही. अवधि को छह से आठ हफ्ते करने पर यह आंकड़ा 59.9, नौ से 11 हफ्ते के बीच करने पर 63.7 और 12 हफ्ते या फिर उससे ज्यादा करने पर बढ़कर 82.4 फीसदी तक पहुंच गया. हालांकि भारत ने दूसरे डोज के अंतराल को अभी आठ हफ्ते तक ही बढ़ाया है. एनटीएजीआई के मुताबिक अभी मौजूद वैज्ञानिक साक्ष्य इतने भरोसेमंद नहीं है कि यह अवधि इससे ज्यादा की जाए. इसके अलावा विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए 12 हफ्ते का समय रखना जोखिम भरा भी है क्योंकि इतने लंबे समय में कई लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ सकते हैं जिससे सारी कवायद बेकार हो जाएगी.

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वैक्सीन के दूसरे शॉट में में दो हफ्ते की ढील से एक बड़ा फायदा यह हो सकता है कि इससे बड़ी संख्या में डोज अनारक्षित रखे जा सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को पहला शॉट लगाया जा सके. सरकार को यह भी लगता है कि इससे बुजुर्गों के लिए भी आसानी हो जाएगी. जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में एनटीएजीआई के डॉ एनके अरोड़ा कहते हैं, ‘अब फ्लैक्सिबिलिटी है… आप 28 से 56 हफ्ते के बीच कभी भी वैक्सीन लगवा सकते हैं.’

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