कोरोना सेल्फ टेस्टिंग किट

ज्ञानकारी | कोविड-19

कोविड-19 की सेल्फ टेस्टिंग किट का इस्तेमाल कौन-कौन कर सकता है और कैसे?

सरकार ने कोरोना वायरस के लिए पहली सेल्फ टेस्टिंग किट को मंजूरी दे दी है

ब्यूरो | 20 मई 2021 | फोटो : mylabdiscoverysolutions.com

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भारत सरकार ने पहली बार एक ऐसी किट को मंजूरी दे दी है जिसकी मदद से कोई भी कोरोना वायरस की टेस्टिंग घर पर ही कर सकता है. कोविसेल्फ नाम की इस किट को पुणे स्थित कंपनी माइलैब डिस्कवरी सॉल्यूशंस ने बनाया है. इसकी कीमत 250 रुपए रखी गई है. कंपनी के मुताबिक इस किट के जरिये लोग दो मिनट में खुद ही कोरोना वायरस की टेस्टिंग कर सकते हैं और 15 मिनट में नतीजा जान सकते हैं. माना जा रहा है कि यह किट मौजूदा हालात में लैब्स पर पड़ रहे असाधारण बोझ को कम करेगी और टेस्टिंग की संख्या बढ़ाएगी.

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भारत में फिलहाल करीब 20 लाख लोगों की रोजाना टेस्टिंग हो रही हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन का कहना है कि इस आंकड़े को जल्द ही 25 लाख तक ले जाया जाएगा. माना जा रहा है कि इसमें सेल्फ टेस्टिंग किट अहम भूमिका निभाएंगे. माइलैब के प्रबंध निदेशक हसमुख रावल का कहना है कि उनकी कंपनी हर हफ्ते 70 लाख किट बना सकती है और एक-दो हफ्ते के भीतर ही इस क्षमता को एक करोड़ तक पहुंचा दिया जाएगा. कोविसेल्फ किट में एक प्री-फिल्ड एक्ट्रैक्शन ट्यूब, एक नेज़ल स्वाब, एक टेस्ट कार्ड और एक बायोहैजार्ड बैग होता है. माइलैब के मुताबिक रिजल्ट पॉजिटिव आने में पांच से सात मिनट लगते हैं जबकि नेगेटिव आने में अधिकतम 15 मिनट.

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कोविसेल्फ का यूजर मैन्युअल कहता है कि किट में दिए गए नेज़ल स्वाब को दोनों नथुनों में दो से चार सेंटीमीटर भीतर घुसाकर पांच बार घुमाएं. इसके बाद स्वाब स्टिक को ट्यूब में भरे बफर सॉल्यूशन में दस बार घुमाएं. फिर स्टिक का जो हिस्सा ट्यूब से बाहर है उसे तोड़ दें और ट्यूब का नोजल कैप लगा दें. ट्यूब को अच्छी तरह हिलाएं और फिर सॉल्यूशन की दो बूंदे टेस्ट कार्ड पर डालें. थोड़ी ही देर में कार्ड पर एक बार नजर आएगा. कार्ड के दो हिस्से होते हैं. अगर बार सिर्फ कंट्रोल सेक्शन यानी सी पर नजर आए तो टेस्ट नेगेटिव होगा. लेकिन अगर यह सी के साथ-साथ टेस्ट यानी टी सेक्शन पर भी दिखे तो इसका मतलब यह है कि आप कोरोना पॉजिटिव हैं.

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सिर्फ उन्हीं लोगों को इस किट का इस्तेमाल करने की सलाह दी है जिनमें कोरोना संक्रमण के लक्षण दिख रहे हों या फिर जो कोरोना पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आए हों. संस्था के मुताबिक इसमें पॉजिटिव पाए जाने के बाद पुष्टि के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट की जरूरत नहीं होगी. माइलैब ने एक मोबाइल ऐप भी बनाया है. इसे गूगल प्ले से डाउनलोड किया जा सकता है और इसकी मदद से यूजर पॉजिटिव पाए जाने पर अपना डेटा सीधे आईसीएमआर को भेज सकेंगे..

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कोविसेल्फ रैपिड एंटीजेन टेस्ट वाली तकनीक पर ही काम करता है. यही वजह है कि इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं क्योंकि इस तकनीक में गलत नतीजे आने की संभावना 60 फीसदी तक देखी गई है. ऐसा इसलिए होता है कि कभी वायरस लोड पर्याप्त नहीं होता तो कभी यूजर को अंदाजा नहीं होता कि स्वाब नाक में कितना भीतर तक डालना है. इसलिए आईसीएमआर का यह भी कहना है कि अगर कोरोना के लक्षण वाले लोगों में कोविसेल्फ का टेस्ट नेगेटिव आता है तो उन्हें तुरंत आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाना चाहिए.

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