सीटी स्कैन

ज्ञानकारी | स्वास्थ्य

कोरोना संक्रमण होने पर सीटी स्कैन कब करवाना चाहिए?

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच देश भर के सीटी स्कैन सेंटरों पर लोगों की भीड़ लगी हुई है

ब्यूरो | 04 मई 2021 | फोटो: पिक्साबे

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कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच देश के लगभग सभी शहरों में सीटी स्कैन सेंटरों पर भी भीड़ उमड़ने की खबरें हैं. इन सेंटरों पर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज तो आ ही रहे हैं, आम सर्दी-जुकाम होने पर भी कई लोग अपने मन से सीटी स्कैन करवाने के लिए भीड़ लगा रहे हैं. कई लोग तो थोड़े-थोड़े अंतराल पर कई बार यह काम कर रहे हैं. आलम यह है कि सोमवार को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान केंद्र (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया को इसे लेकर चेतावनी जारी करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि जरूरत न होने पर भी सीटी स्कैन करवाने वाले ऐसे लोगों को लेने के देने पड़ सकते हैं.

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कंप्यूटेड टोमोग्राफी यानी सीटी स्कैन एक मेडिकल इमेजिंग तकनीक है जिसमें पूरे शरीर या फिर इसके किसी खास हिस्से की तस्वीर उतारी जाती है. इस तस्वीर को तैयार करने के लिए मल्टीपल एक्सरेज और एक कंप्यूटर प्रोसेस का इस्तेमाल किया जाता है. इसके जरिये किसी आम एक्सरे की तुलना में कहीं ज्यादा विस्तृत जानकारी हासिल की जा सकती है. यह तकनीक मेडिकल साइंस की रेडियोलॉजी शाखा के तहत आती है. सीटी स्कैन करने वाले विशेषज्ञ को रेडियोग्राफर कहा जाता है.

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विशेषज्ञों के मुताबिक अब ऐसे भी बहुत से मामले मिल रहे हैं जिनमें कोरोना वायरस का संक्रमण आरटी-पीसीआर या फिर एंटीजेन टेस्ट जैसे प्रचलित तरीकों से पकड़ में नहीं आ रहा. इसकी वजह यह है कि वायरस कई बार नाक या मुंह में ज्यादा देर न ठहरते हुए फेफड़ों तक चला जा रहा है. ऐसे में जब मुंह या नाक से स्वैब लिया जाता है तो रिपोर्ट नेगेटिव आती है जबकि मरीज में कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे होते हैं. इसके बाद डॉक्टर कोरोना वायरस से फेफड़ों के संक्रमण यानी न्यूमोनिया की जांच करने के लिए सीटी स्कैन की सलाह देते हैं.

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डॉ रणदीप गुलेलिया का कहना है कि कोविड-19 के जिन मरीजों को कोई समस्या नहीं है यानी जो असिंप्टोमेटिक हैं, उन्हें सीटी स्कैन करवाने की कोई जरूरत नहीं है. उनके मुताबिक हल्के-फुल्के लक्षण वाले ऐसे मरीजों को भी इससे बचना चाहिए जिनका ऑक्सीजन स्तर सामान्य है. दूसरे विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो डॉक्टर सबसे पहले एक्सरे करवाने को कहेगा और फिर इसके बाद भी उसे आवश्यकता लगती है तो सीटी स्कैन के विकल्प की तरफ बढ़ा जा सकता है, लेकिन यह डॉक्टर पर ही छोड़ देना चाहिए. कोरोना के ज्यादातर मामलों में सीटी स्कैन तब करवाया जाता है जब मरीज अस्पताल में भर्ती हो जाए.

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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के वाइस प्रेसीडेंट डॉ. नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि मौजूदा हालात में लोग घबराए हुए हैं और इंटरनेट पर आ रही जानकारियां पढ़कर वह कर रहे हैं जो किसी डॉक्टर का काम है. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अपने मन से सीटी स्कैन करवाना फिजूलखर्ची तो है ही, इसके गंभीर नतीजे भी हो सकते हैं. जैसा कि डॉ रणदीप गुलेलिया का कहना था कि एक सीटी स्कैन छाती के 300 से 400 एक्सरे के बराबर होता है. और बार-बार सीटी स्कैन कराना कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है. रेडिएशन के संपर्क में बार-बार आने से भी नुकसान हो सकता है.

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