कोरोना वायरस वैक्सीन

ज्ञानकारी | कोविड-19

भारत में उपजे कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट ने पूरी दुनिया की चिंता क्यों बढ़ा दी है?

कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट का नाम है बी.1.617 जिसे हाल तक 'दिलचस्पी का विषय' बताने वाला डब्लूएचओ अब 'चिंता का विषय' बता रहा है

ब्यूरो | 12 मई 2021 | फोटो: पिक्साबे

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दुनिया को चिंता में डालते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस के एक नए वेरिएंट के वर्गीकरण में बदलाव कर दिया है. अब तक यह ‘दिलचस्पी का विषय’ था, लेकिन अब इसे बदलकर ‘वैश्विक चिंता का विषय’ कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि यह नया वेरिएंट, संक्रमण की रफ्तार या मौतों की संख्या या फिर टेस्टिंग और वैक्सीन के प्रति इसके बदलते व्यवहार की वजह से वैज्ञानिकों के माथे पर बल डाल रहा है. यह वेरिएंट भारत में ही पैदा हुआ है और इसका नाम है बी.1.617. वैसे इंग्लैंड में स्वास्थ्य अधिकारियों ने डब्ल्यूएचओ की चेतावनी से पहले ही इस वेरिएंट को चिंता के साथ देखना और बरतना शुरू कर दिया था. फिलहाल बी.1.617 दुनिया के 44 देशों में घुसपैठ कर चुका है.

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बी.1.617 को डबल म्यूटेंट भी कहा जा रहा है क्योंकि कोरोना वायरस के इस वेरिएंट में दो म्यूटेशन (बदलाव) देखे गए हैं. सबसे पहले बीते अक्टूबर में इसका पता चला था जब महाराष्ट्र के विदर्भ में कई मरीजों के सैंपल में यह पाया गया. बताया जा रहा है कि इस वेरिएंट में कोरोना वायरस के दो अलग-अलग स्वरूपों का मेल है. म्यूटेशन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके तहत वायरस वक्त के साथ अपनी संरचना में इस तरह के बदलाव करता है जिससे उसकी जीवित रहने और अपनी तादाद में बढ़ोतरी की क्षमता बढ़ जाए.

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भारत में कोरोना वायरस की दूसरी लहर अगर इस कदर विकराल है तो इसमे बी.1.617 का भी अहम योगदान माना जा रहा है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह वेरिएंट न सिर्फ शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली (इम्यूनिटी) को छकाने में ज्यादा माहिर है, बल्कि यह वैक्सीन के चलते शरीर में पैदा हुई एंटीबॉडीज को भी ठीक-ठाक हद तक चकमा दे सकता है. माना जा रहा है कि इसके चलते ही उन लोगों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण देखने में आ रहा है जो वैक्सीन लगवा चुके थे. जानकारों के मुताबिक अभी तक राहत की बात यह है कि वैक्सीन लगवा चुके लोगों में यह संक्रमण जानलेवा साबित नहीं हो रहा है.

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दूसरी लहर के दौरान भारत में कोरोना वायरस का लगभग अबाध प्रसार हुआ है और इस तथ्य ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है. जानकारों के मुताबिक भारत में दूसरी लहर पर काबू पाने में जितनी देर लगेगी, एक ऐसे वेरिएंट के उभरने का खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा जिस पर वैक्सीन का असर नहीं होगा. कुछ जानकारों का तो यहां तक कहना है कि इस विपदा में भारत की मदद कर रहे देशों को इसके एवज में उस पर दबाब बनाना चाहिए. दबाव इस बात का कि वह संक्रमण के मामलों और मौतों के सही रिकॉर्ड के अलावा नए वेरिएंट्स से जुड़ीं ज्यादा से ज्यादा जानकारियां दुनिया के सामने रखे. यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद ज़रूरी है.

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भारत में इससे पहले कोरोना वायरस के एक नए वेरिएंट बी.1.618 ने भी वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी थी. इस वेरिएंट में तीन म्यूटेशन (बदलाव) देखे गए हैं. इसके बारे में विस्तृत जानकारियां जुटाने की कवायद जारी है. कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस के नए-नए वेरिएंट बनने के लिए आदर्श परिस्थितियां हैं. जैसा कि बीबीसी से बातचीत में यूनिवर्सिटी ऑफ केंब्रिज में क्लिनिकल माइक्रोबॉयलॉजी के प्रोफेसर रवि गुप्ता कहते हैं, ‘विशाल जनसंख्या और इसका घनत्व वायरस को खुद में बदलाव करने के लिए आदर्श माहौल मुहैय्या करा रहा है.’ ऊपर से मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपायों को लेकर आम लोगों की लापरवाही और इस समस्या से निपटने में विभिन्न सरकारों की असफलता कोढ़ में खाज का काम कर रही हैं.

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