कोरोना वायरस वैक्सीन

ज्ञानकारी | स्वास्थ्य

ब्रिटेन में एक नए और ‘बेकाबू’ कोरोना वायरस का मिलना कितनी चिंता की बात है?

कोरोना वायरस के इस नए स्ट्रेन के चलते ब्रिटेन में अब तक की सबसे कड़ी पाबंदियां लगा दी गई हैं. कई देशों ने उस पर यात्रा प्रतिबंध भी लगा दिए हैं

ब्यूरो | 21 दिसंबर 2020 | फोटो: पिक्साबे

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क्रिसमस से पहले ब्रिटेन में हालात अचानक बिगड़ गए हैं. यह कोरोना वायरस के एक नए स्वरूप यानी स्ट्रेन की वजह से हुआ है. वीयूआई–202012/01 नाम के इस नए स्ट्रेन के चलते वहां कोविड-19 के साप्ताहिक आंकड़ों में 60 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के मुताबिक यह नया स्ट्रेन ज्यादा तेजी से फैल रहा है. उधर, देश के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैंकॉक ने इस स्ट्रेन को बेकाबू बताया है जो महामारी के स्तर पर संक्रमण फैला रहा है. ब्रिटिश सरकार ने इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन को जानकारी दे दी है. देश में अब तक की सबसे कड़ी पाबंदियां भी लागू कर दी गई हैं.

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कोरोना वायरस के इस नए स्ट्रेन की भयावहता को देखते हुए जर्मनी, इटली, फ्रांस और नीदरलैंड्स सहित यूरोप के कई देशों ने ब्रिटेन से आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है. यूरोपीय संघ ने भी एक बैठक बुलाकर हालात के मद्देनजर इस वायरस के खिलाफ रणनीति बदलने पर चर्चा की. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी नई दिल्ली में एक आपात बैठक की थी जिसके बाद ब्रिटेन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए गए.

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वायरसों का रूप बदलना यानी म्यूटेशन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. यह उनका निरंतर विकसित होती शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम को गच्चा देने का तरीका है. कोरोना वायरस को ही लें तो एक साल पहले चीन के वुहान में पाए जाने के बाद से इसमें हर महीने करीब दो म्यूटेशन हो रहे हैं. लेकिन अक्सर इनसे कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता. ब्रिटेन में मिले नए स्ट्रेन ने वैज्ञानिकों की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इसके स्पाइक प्रोटीन में बहुत से बदलाव देखे गए हैं. इस प्रोटीन की मदद से ही कोरोना वायरस शरीर की कोशिकाओं पर हमला करता है. नए म्यूटेशन ने वायरस के लिए शरीर में दाखिल होना ज्यादा आसान बना दिया है. ब्रिटेन में अब जो नए संक्रमण हो रहे हैं उनमें से दो तिहाई कोरोना वायरस के इसी नए स्ट्रेन की वजह से हो रहे हैं.

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स्पाइक प्रोटीन में हो रहे इस बदलाव ने इस वायरस के खिलाफ विकसित की गई वैक्सीन को लेकर भी शंकाएं पैदा कर दी हैं. इसकी वजह यह है कि सबसे ज्यादा उम्मीदें फाइजर, मॉडर्ना और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कई गई वैक्सीनों से हैं और ये सभी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को इन स्पाइक प्रोटीनों पर हमला करने के लिए ही प्रशिक्षित करती हैं. इसलिए ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैंकॉक सहित कई मान रहे हैं कि हो सकता है ये वैक्सीनें इस नए वायरस के खिलाफ प्रभावी न हों.

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हालांकि एक वर्ग का यह भी मानना है कि कोरोना वायरस के इस नए स्ट्रेन को लेकर अचानक से बहुत घबराना ठीक नहीं है. नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में मॉलिक्यूलर वायरोलॉजी के प्रोफेसर जॉनाथन बॉल कहते हैं, ‘जब तक कि हम वायरस में आए बदलाव और उसके प्रभाव का अध्ययन नहीं कर लेते तब तक कोई भी दावा करना जल्दबाजी होगी.’ कुछ दूसरे जानकार भी मानते हैं कि अभी इसके कोई स्पष्ट सबूत नहीं है कि वैक्सीन इस वायरस पर असरदार साबित नहीं होगी. उनके मुताबिक अगर ऐसा हो भी तो भी चिंता की बात नहीं है क्योंकि इन नई वैक्सीनों की तकनीक इस तरह की है कि इन्हें नए स्ट्रेन के हिसाब से काफी तेज़ी से बदला जा सकता है.

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