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क्या यह सच है कि चिकन या अंडा खाने से बर्ड फ्लू हो सकता है?

कोविड-19 से जूझ रही दुनिया की चिंता बर्ड फ्लू की दस्तक ने बढ़ा दी है

ब्यूरो | 15 जनवरी 2021 | फोटो: पिक्साबे

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बर्ड फ्लू क्या है?

बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है. इन्फ्लूएंजा नाम के वायरस से होने वाला यह संक्रमण मुख्य रूप से पक्षियों को अपना शिकार बनाता है. कोविड-19 की तरह बर्ड फ्लू भी सबसे पहले चीन में सामने आया था. यह 1996 की बात है. इंसानों में बर्ड फ्लू के संक्रमण का पहला मामला 1997 में हांगकांग में देखने को मिला था. इन संक्रमणों के पीछे इन्फ्लुएंज़ा वायरस का एच5एन1 स्ट्रेन था जो आज भी सबसे ज्यादा संक्रमणकारी माना जाता है. बाद में एच5एन2 और एच9एन2 जैसे इसके दूसरे स्ट्रेन्स के बारे में भी जानकारी मिली. बीते दो दशक में बर्ड फ्लू के चलते दसियों करोड़ पक्षियों की जान जा चुकी है. इनमें से एक बड़ी संख्या उनकी है जिन्हें संक्रमण की पुष्टि के बाद मार दिया गया. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 2003 से अब तक बर्ड फ्लू ने 17 देशों में 862 इंसानों को भी अपना शिकार बनाया है जिनमें से 455 की मौत हो गई.

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बर्ड फ्लू कैसे और किनमें फैलता है?

बर्ड फ्लू अब तक 60 से भी ज्यादा देशों में पांव पसार चुका है. इनमें से चीन, भारत, बांग्लादेश, मिस्र, इंडोनेशिया और वियतनाम को उन देशों रखा गया है जहां यह महामारी के पैमाने पर फैल सकता है. बर्ड फ्लू के वायरस को जलीय प्रवासी पक्षी दूर-दूर तक ले जाते हैं. इन पक्षियों की बीट और लार के संपर्क में जब दूसरे पक्षी आते हैं तो वे भी संक्रमित हो जाते हैं. इसी रास्ते से यह कभी-कभी कुत्तों, बिल्लियों, घोड़ों, सुअरों और इंसानों को भी संक्रमित कर देता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक बर्ड फ्लू का इंसानों से इंसानों में फैलना बहुत दुर्लभ है. संस्था के मुताबिक अच्छी तरह से पकाए गए मांस और अंडों से भी बर्ड फ्लू के फैलने की संभावना नहीं होती क्योंकि 70 डिग्री से ऊपर के तापमान में इसका वायरस नष्ट हो जाता है.

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तो क्या इंसानों को बर्ड फ्लू से डरने की जरूरत नहीं है?

चूंकि बर्ड फ्लू से संक्रमित 60 फीसदी तक इंसानों की मृत्यु हो जाती है इसलिए वैज्ञानिकों का एक बड़ा वर्ग इसे लेकर काफी आशंकित रहता है. दरअसल आसानी से फैलने के लिए वायरस अपने आपको बदलते रहते हैं. इस प्रक्रिया को म्यूटेशन कहते हैं. जानकारों के मुताबिक हो सकता है कि निकट भविष्य में यह वायरस खुद को इस तरह से बदल ले कि इसका इंसानों से इंसानों में फैलना आसान हो जाए. अगर ऐसा होता है तो इससे होने वाला नुकसान कोविड-19 की तुलना में कहीं बड़ा हो सकता है. इसे देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन योजनाएं बनाई जा चुकी हैं. इनमें प्रायोगिक एच5एन1 वैक्सीनों से लेकर इससे जुड़ी एंटीवायरल दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक भी शामिल है.

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बर्ड फ्लू के लक्षण

बर्ड फ्लू के कुछ लक्षण कोविड-19 से मिलते हैं. जैसे इसमें भी मरीजों को बुखार, सिरदर्द और खांसी की शिकायत होती है. कई लोग मांसपेशियों में दर्द की भी शिकायत करते हैं. संक्रमण गंभीर होने पर न्यूमोनिया में तब्दील हो सकता है. किसी पोल्ट्री फॉर्म में बर्ड फ्लू की पहचान मुर्गियों की सुस्ती के अलावा उनकी कलगी में आई सूजन और बार-बार मलत्याग जैसे लक्षणों से की जाती है. इसके इलाज के लिए ऑसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है.

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भारत पर इसका असर

भारत में यह बीमारी पहली बार बड़े पैमाने पर 2006 में फैली थी. संक्रमण के ज्यादातर मामले महाराष्ट्र और गुजरात के पोल्ट्री फार्मों में देखने को मिले थे. फिर 2008 में पश्चिम बंगाल और 2014 में केरल में इसका प्रकोप देखने को मिला. अभी तक देश में इस बीमारी के इंसानी संक्रमण का कोई मामला देखने में नहीं आया है. सितंबर 2019 में भारत ने खुद को बर्ड फ्लू से मुक्त घोषित कर दिया था, लेकिन 2021 की शुरुआत में इसने फिर दस्तक दे दी है. राजस्थान और मध्य प्रदेश सहित 10 से ज्यादा राज्य इससे प्रभावित हैं. यानी कोरोना वायरस के चलते बीते साल सात हजार करोड़ रु से भी ज्यादा का नुकसान झेलने वाले पोल्ट्री उद्योग पर एक बार फिर गाज गिर गई है.

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