अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

ज्ञानकारी | विदेश

अमेरिकी संविधान का वह 25वां संशोधन क्या है जिसके जरिये डोनाल्ड ट्रंप को तुरंत हटाया जा सकता है?

अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों के उत्पात के बाद वहां संविधान के इस प्रावधान के इस्तेमाल को लेकर चर्चा गर्म है

ब्यूरो | 07 जनवरी 2021

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो हफ्ते सबसे ज्यादा हंगामाखेज होने जा रहे हैं. बुधवार को उनके समर्थकों की एक भीड़ वाशिंगटन स्थित कैपिटल बिल्डिंग यानी संसद भवन में घुस गई. ये समर्थक अमेरिकी कांग्रेस की कार्यवाही रोकना चाहते थे ताकि ताकि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन को 2020 के चुनाव में जीत का सर्टिफिकेट न मिल सके. इस दौरान हुई हिंसा में एक महिला सहित चार लोगों की मौत हो गई. इस मामले में 50 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. राजधानी वाशिंगटन डीसी में 15 दिनों के लिए कर्फ्यू लगा दिया गया है.

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनिया के तमाम देश के राष्ट्राध्यक्षों ने इस घटना पर चिंता जताई है. अमेरिका के सभी पूर्व राष्ट्रपतियों ने भी इसकी आलोचना की है. बराक ओबामा ने कहा है कि इतिहास इस हिंसा को देश के अपमान और जिल्लत के रूप में याद रखेगा. एक और पूर्व राष्ट्रपति और डोनाल्ड ट्रंप की ही रिपब्लिकन पार्टी से ताल्लुक रखने वाले जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने इसे विद्रोह करार दिया है. उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने भी इसे काला दिन बताया है. उधर, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समर्थन में संसद पर धावा बोलने वाली हमलावर भीड़ को बहुत खास बताया है. यही नहीं, उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में धांधली का दावा करते हुए इस हिंसा को उचित भी ठहराया. फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम ने इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक अकाउंट ब्लॉक कर दिए.

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इस घटना के बाद अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप को संविधान के 25वें संशोधन का इस्तेमाल कर पद से हटाने की मांग हो रही है. यह मांग करने वालों में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े नाम और वेरमॉन्ट के गवर्नर फिल स्कॉट भी शामिल हैं. डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल 20 जनवरी तक है. अगर ऐसा होता है तो अमेरिका के इतिहास में वे पहले ऐसे राष्ट्रपति होंगे जिन्हें इस तरह हटना पड़ेगा. यह संभावना इसलिए भी बढ़ गई है कि इस पूरी प्रक्रिया में उपराष्ट्रपति की अहम भूमिका होती है और अब तक डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन में रहे मौजूदा उपराष्ट्रपति माइक पेंस भी अब उनसे दूर खड़े दिख रहे हैं. उन्होंने कहा है कि जो बाइडेन और कमला हैरिस को अमेरिकी की जनता ने चुना है और डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बावजूद वे जनादेश के खिलाफ नहीं जाएंगे.

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संविधान में 25वें संशोधन को अमेरिकी संसद ने 1967 में मंजूरी दी थी. इसकी वजह 1963 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या के बाद उपजी परिस्थितियों को माना जाता है. उस समय तत्कालीन उपराष्ट्रपति लिंडन जॉनसन के भी घायल होने की खबरें आई थीं. हालांकि ये गलत निकलीं और कैनेडी की हत्या के दो घंटे बाद ही लिंडन जॉनसन ने राष्ट्रपति की कुर्सी संभाल ली. लेकिन इसके साथ ही अमेरिकी संविधान में यह व्यवस्था करने की जरूरत महसूस हुई कि राष्ट्रपति की अचानक मौत, इस्तीफे या पद संभालने में असमर्थ हो जाने पर उनकी जगह कौन लेगा. इसके बाद 25वां संशोधन वजूद में आया. इस संशोधन के चार हिस्से या सेक्शन हैं. इनमें से चौथा सेक्शन उस स्थिति से जुड़ा है जब कोई राष्ट्रपति अपना कार्यभार संभालने में असमर्थ हो, लेकिन अपना पद नहीं छोड़ रहा हो. ऐसे में उसे हटाने के लिए उसका मंत्रिमंडल बहुमत से और उपराष्ट्रपति के साथ मिलकर कदम उठा सकता है. वह सीनेट के दूसरे सबसे बड़े अधिकारी (पहला उपराष्ट्रपति होता है) यानी प्रेसीडेंट प्रो टेंपरी और निचले सदन यानी हाउस ऑफ रेप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष को यह लिखकर दे सकता है कि मौजूदा राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ है.

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कैबिनेट के बहुमत और उपराष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाली इस घोषणा के साथ ही राष्ट्रपति की शक्तियां उपराष्ट्रपति के पास आ जाती हैं. यानी वह अमेरिका का कार्यवाहक राष्ट्रपति हो जाता है. इस बीच राष्ट्रपति के पास इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प होता है. वह भी संसद को चिट्ठी लिखकर यह दावा कर सकता है कि वह अपना कार्यभार संभालने के लिए सक्षम है. इसके चार दिन के भीतर उपराष्ट्रपति और कैबिनेट इस दावे को चुनौती दे सकते हैं. इसके बाद फैसला संसद करती है. अगर सत्र चल रहा हो तो इस मुद्दे पर 48 घंटे के भीतर वोटिंग अनिवार्य होती है और अगर सत्र न चल रहा हो तो इसे 21 दिन के भीतर बुलाने का प्रावधान है. अगर दोनों सदन राष्ट्रपति के खिलाफ दो तिहाई बहुमत से फैसला दे देते हैं तो उसकी विदाई पर आखिरी मुहर लग जाती है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान भी उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति की तरह काम करना जारी रख सकता है.

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