जीरो में शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा

मनोरंजन | सिनेमा

जीरो: शाहरुख खान के अभिनय से सजा लेकिन उनकी छवि के नीचे दबा सिनेमा

निर्देशक: आनंद एल राय | लेखक: हिमांशु शर्मा | कलाकार: शाहरुख खान, अनुष्का शर्मा, कैटरीना कैफ, तिग्मांशु धूलिया | रेटिंग: 2/5

ब्यूरो | 21 दिसंबर 2018

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शाहरुख खान को लेकर जब भी कोई नया प्रतिभावान निर्देशक फिल्म बनाता है, तो उनकी अति विशाल रोमांटिक छवि के हिसाब से अपनी फिल्म को ढालने की कोशिश करने लगता है. यही मुख्य वजह है, कि वो अक्सर मात खा जाता है. इम्तियाज अली की रोमांटिक फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ के बाद, आनंद एल राय भी जीरो में शाहरुख की इसी विशालकाय इमेज के बोझ तले दब गए लगते हैं.

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मध्यांतर से पहले की ‘जीरो’, कमाल है. बउआ सिंह यानी शाहरुख खान कमाल हैं और हिमांशु शर्मा की लिखाई भी कमाल ही है. फिल्म में शाहरुख खान, अनुष्का और कैटरीना कैफ के मुख्य किरदारों को दिलचस्प अंदाज में स्थापित किया जाता है, और बउआ सिंह को केंद्र में रखकर निर्देशक आनंद राय, एकदम राजकुमार हिरानी के स्तर का हास्य में डूबा मनोरंजन परोसते हैं.

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मध्यांतर से थोड़ा सा पहले से शाहरुख खान की कई दूसरी रोमांटिक फिल्मों की तरह ‘जीरो’ प्रेडिक्टिबल होने लगती है, और मध्यांतर के बाद भयानक रूप से बोर करने लगती है. ग्रैंड तरीके से सच्ची मोहब्बत को परदे पर दिखाने की ललक फिल्म का बेड़ा गर्क कर देती है.

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‘जीरो’ में शाहरुख खान का बौना अवतार खासा प्रभावी दिखता है. बौने बउआ सिंह के रोल में वे ‘फैन’ के स्तर का बढ़िया काम करते हैं. हिमांशु शर्मा के लिखे छोटे शहर के स्वार्थी किरदार को न सिर्फ वे परदे पर जीवंत करते हैं बल्कि अपने पुराने हो चुके एक्सप्रेशन्स से उसे काफी हद तक मुक्त भी रखते हैं. लेकिन शाहरुख खान के साथ प्रेम पर एक महान फिल्म बनाने की आनंद राय की महत्वाकांक्षा, जीरो को एक भारी-भरकम, प्रवचन-नुमा सिनेमा में तब्दील कर देती है.

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‘जीरो’ में एक रिस्की किरदार निभाने के लिए अनुष्का शर्मा की दाद देनी होगी – कि उन्होंने परदे पर सुंदर नहीं नजर आने वाली साइंटिस्ट की भूमिका करने की चुनौती स्वीकार की. लेकिन जीरो का सबसे बड़ा आश्चर्य हैं कैटरीना कैफ. वे इसमें अच्छा काम करती हैं. ऐसा काम शायद उन्होंने हाल के कई सालों में नहीं किया है. इसलिए कमाल बउआ सिंह के अलावा अभिनय का यह चमत्कार देखने के लिए भी आप ‘जीरो’ देख सकते हैं!

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