मलाल में मीज़ान और शरमीन सैगल

मनोरंजन | सिनेमा

मलाल: इसका संगीत फिल्म की बाकी खामियों का मलाल नहीं होने देता

कलाकार: शरमीन सैगल, मीज़ान, समीर धर्माधिकारी | निर्देशक: मंगेश हडावले | रेटिंग: 2.5/5

ब्यूरो | 05 जुलाई 2019

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‘मलाल’ का टाइटल अंदाजा देता है कि फिल्म का अंत …और वे खुशी-खुशी रहने लगे वाले अंदाज में नहीं होगा, और लगभग ऐसा ही कुछ होता भी है. लेकिन ऐसा होने के पहले फिल्म आपको इमोशन्स की एक रोलर-कोस्टर राइड पर ले जाती है. शुरूआत के दस मिनट बीतते ही आप ‘मलाल’ के किरदारों के साथ हंसने-रोने और नाचने-गाने लगते हैं. अच्छा यह है कि समानुभूति का यह भाव आखिरी दृश्य तक बना रहता है.

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‘मलाल’ एक मराठी लड़के और उत्तर भारतीय लड़की की प्रेम कहानी है, इसलिए इसके प्लॉट का एक हिस्सा इससे जुड़ी राजनीति की झलक भी दिखाता है. लेकिन असल में यह जिंदगी को पूरे 180 डिग्री पर मोड़ देने वाले सच्चे प्यार की कहानी है. मलाल से इस बात के लिए नाराज हुआ जा सकता है कि यह एक बार फिर उस टपोरी-मवाली हीरो को वापस ले आई है जिससे हिंदी सिनेमा ने बीते कुछ समय से दूरी बनाकर रखी थी. उस पर से उसे सुधारने का जिम्मा भी हिरोइन को दे दिया है और यह बात सिनेमा को फेमिनिज्म के तराजू पर तौलने वालों को अखर सकती है.

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हालांकि संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन तले बनी ‘मलाल’ भंसाली मार्का भव्यता से तो दूरी बनाकर रखती है, लेकिन फिल्म ने अपनी रूह उनके संगीत से ही पाई है. मलाल के ज्यादातर गानों की कंपोजीशन भंसाली ने की है, जिन्हें बखूबी पहचाना जा सकता है. खासतौर पर ‘उधळ हो’ गाना जो अपने संगीत और फिल्मांकन दोनों से आपको डोला रे या पिंगा की याद दिला देता है. इसमें शैल हाड़ा और श्रेयस पुराणिक ने एक-एक गीत रचा है और ज्यादातर गाने गीतकार प्रशांत इंगोले ने लिखे हैं.

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मलाल के जरिए संजय लीला भंसाली ने अपनी भांजी शरमीन सैगल और जावेद जाफरी के बेटे मीज़ान को बॉलीवुड में एंट्री दिलाई है. बेहद आम से चेहरे वाले ये दोनों ही कलाकार अपने अभिनय से आपको प्रभावित करते हैं. ठीक-ठीक अभिनय करने शरमीन की हंसी जहां आपको याद रह जाती है, वहीं मीज़ान की स्क्रीन प्रजेंस आपको एक स्टार के आने की आहट देती सी लगती है.

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‘तिंग्या’ सरीखी कुछ बेहतरीन मराठी फिल्मों का लेखन-निर्देशन करने वाले मंगेश हडावले ने इस फिल्म का निर्देशन किया है. ‘मलाल’ में हडावले ने प्रेम को अभिव्यक्ति देते हुए कुछ जगहों पर इतने सुंदर फ्रेम्स का इस्तेमाल किया है जो आपको लंबे समय तक याद रह जाने वाले हैं. मराठी माहौल की बारीकियां भी उन्होंने बहुत सधे तरीके फिल्म में डाली हैं. कुल मिलाकर, यह प्रेम कहानी बारिश के मौसम को सही शुरूआत देती है और मौका लगे तो देख ली जानी चाहिए.

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