कलंक में आलिया भट्ट

मनोरंजन | सिनेमा

‘कलंक’ के बारे में 5 फिल्म समीक्षाएं क्या कहती हैं?

कलाकार: आलिया भट्ट, वरुण धवन, माधुरी दीक्षित, सोनाक्षी सिन्हा | निर्देशक: अभिषेक वर्मन | लेखक: शिबानी भटिजा | औसत रेटिंग: 2.3/5

ब्यूरो | 19 अप्रैल 2019

1

फिल्म कंपेनियन: (तीन स्टार)

संजय लीला भंसाली के शिष्य अभिषेक वर्मन ने ‘कलंक’ में अपना एक अलग कल्पना संसार रचा है जिसमें सुंदर लोग, शानदार कपड़े पहने मद्धिम रोशनी में आते-जाते दिखाई देते हैं. इनकी भव्यता और भावुकता इस फिल्म की खासियत है. लेकिन यह फिल्म सबके लिए नहीं है क्योंकि इसे देखने के लिए आपको अविश्वास करना छोड़ना होगा. फिल्म देखते हुए वास्तविकता, तर्क और ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़े सवाल आप नहीं कर सकते हैं.

2

स्क्रोल.इन: (दो स्टार)

कलंक में आसमान छूते भव्य सेट्स हैं. सुंदर कॉस्ट्यूम इतना प्रभावित करते हैं कि आपको भी दर्जी के पास जाने की जल्दी होने लगती है. (यहां तक फिल्म में नौकरों ने भी किसी औसत दर्शक से अच्छे कपड़े पहने हैं.) बाकी फिल्म में सुंदर चेहरों की भरमार है. इनकी सुंदरता ऐसी है कि मरणासन्न दिखाए जाने पर भी उन पर शिकन तक नहीं आती है. कुल मिलाकर जो दिखता है, वह बड़े परदे के अनुभव को कमाल बनाने वाला है. लेकिन इसे देखकर जो महसूस होना चाहिए, दर्शक उससे दूर ही रह जाते हैं.

3

द हिंदू: (दो स्टार)

सालों बाद साथ आने के बाद भी माधुरी दीक्षित और संजय दत्त किसी तरह का नॉस्टैल्जिया नहीं जगा पाते हैं. संजय दत्त को देखकर ऐसा लगता है कि माधुरी के साथ नज़र आने में उनकी कोई रुचि ही नहीं है. वहीं माधुरी भी अपने डांस या अभिनय से वह कमाल नहीं दिखा पातीं, जिसके लिए वे जानी जाती हैं. वरुण धवन और आदित्य रॉय कपूर जहां अपनी भूमिकाएं ठीक-ठाक निभाते हैं, वहीं सोनाक्षी सिन्हा के लिए फिल्म में ज्यादा गुंजाइश नहीं है. इन सबके बीच केवल आलिया भट्ट हैं जिन्हें आप देखना चाहते हैं.

4

सत्याग्रह ( दो स्टार)

कलंक की हर छोटी-बड़ी बातचीत भारी-भरकम संवादों से लबरेज मिलती है. इसी वजह से कई जगह फिल्म नकली इमोशन्स की बू छोड़ती है. एक जगह फ्लर्ट करते वरुण शर्माती आलिया से कहते हैं कि ‘अपनी आंखों की कशिश को पलकों के एतराज से छिपाने की कोशिश न करो!’ एक दूसरी जगह दोनों जब एक-दूसरे के करीब आ रहे होते हैं तो दूर छिटकते हुए वरुण फिर डायलॉग मारते हैं, ‘हमें निकलना चाहिए, वर्ना ये शाम हमसे आगे निकल जाएगी!’ बेचारी आलिया! उसके किरदार ने तो जफ़र नाम के गर्म दिमाग लोहार से प्यार किया था. उसे क्या पता था कि गुलजार और जावेद अख्तर की मिलावट करने वाला डफर भी साथ मिलेगा!

5

द क्विंट: (ढाई स्टार)

शुरूआती कुछ दृश्यों के बाद ही ‘कलंक’ की स्टोरीलाइन का पूरा-पूरा अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसा लगता है कि निर्देशक अभिषेक वर्मन ने दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, हम दिल दे चुके सनम, गदर जैसी फिल्मों से सफलता का फॉर्मूला निकाला है और ‘कलंक’ की शकल में परोस दिया है. फिल्म में सेट्स, कपड़े, संगीत सबकुछ बहुत खूबसूरत है, सिवाय कहानी के.

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