ब्लैंक में सनी देओल

मनोरंजन | सिनेमा

ब्लैंक: एक ऐसी फिल्म जो मनोरंजन के मामले में भी अपने नाम को सार्थक करती है

कलाकार: सनी देओल, करण कपाड़िया, इशिता दत्ता, करणवीर शर्मा | लेखक-निर्देशक: बेहज़ाद खम्बाटा | रेटिंग: 1/5

ब्यूरो | 03 जून 2019

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ब्लैंक, सनी देओल की पिछली तमाम फिल्मों से जरा भी अलग नहीं है. इस बार भी उनका देश खतरे में है और वे जान की बाजी लगाकर इसे बचाने वाले हैं. इस कथा में थोड़ा रोमांच आए इसलिए साधारण बम की जगह ह्यूमन बम का इस्तेमाल किया गया है. हालांकि यह भी पहले दिल से और मद्रास कैफे जैसी कई फिल्मों में हो चुका है.

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इसके अलावा फिल्म में एक ट्विस्ट भी है. ब्लैंक में सीने पर बम लगाए मुंबई की सड़कों पर बेतहाशा भागने वाले किरदार का नाम हनीफ है. और ट्विस्ट यह है कि वह अपनी याद्दाश्त खो चुका है. इसलिए सनी देओल को बम डिफ्यूज करने के लिए कोई दूसरा रास्ता खोजना है जिसमें वे अगले पौने दो घंटे लगाते हैं.

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हनीफ की यह भूमिका डिंपल कपाड़िया के भांजे और गुजरे जमाने की अभिनेत्री सिंपल कपाड़िया के बेटे करण कपाड़िया ने निभाई है. करण को अगर किसी रोमांटिक फिल्म से बॉलीवुड में एंट्री दिलाई जाती तो  उनके पास नाचने-गाने और अदाएं दिखाने के मौके होते. और हमारे पास उनके बारे में कहने के लिए कुछ होता. लेकिन फिलहाल सिर्फ यह पता चल पाया है कि उन्हें एक्टिंग और एक्शन में से किसी का ए भी नहीं आता है.

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ब्लैंक में इस्लामोफोबिया कूट-कूटकर भरा गया है. इतना ज्यादा कि उर्दू शब्दों तक से दूरी बना कर रखी गई है. अगर कोई और वक्त होता तो शायद इस फिल्म से शिकायत थोड़ी कम होती लेकिन इस दौर में ऐसी फिल्मों का बनना खतरनाक लगता है.

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फिल्म का लेखन और निर्देशन बेहज़ाद खम्बाटा ने किया है. अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने काफी कुछ ब्लैंक छोड़ दिया है. मसलन कहानी और अभिनय. हालांकि फिल्म में संवाद तो काफी भारी-भरकम हैं लेकिन वे इसके मिजाज़ को सूट नहीं करते, इसलिए चिढ़न पैदा करते हैं. गाने भी हैं जो गलत जगह पर आते हैं. कुल मिलाकर फिल्म मनोरंजन के मामले में भी ब्लैंक ही रहती है.

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