जंगली में विद्युत जामवाल

मनोरंजन | सिनेमा

जंगली: हाथी तो फिल्म में बच गए, दर्शक इस फिल्म से बचें!

कलाकार: विद्युत जामवाल, पूजा सावंत, मकरंद देशपांडे, अक्षय ओबेरॉय, अतुल कुलकर्णी, आशा भट | निर्देशक: चक रशेल | लेखक: अक्षत घिल्डियाल, सुमन अधिकारी | रेटिंग: 1/5

ब्यूरो | 30 मार्च 2019

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हॉलीवुड निर्देशक चक रशेल का एडवेंचर ड्रामा ‘जंगली’ हाथी दांत की तस्करी के आसपास रचा गया है. यहां पर असल में तो थाइलैंड की हरियाली दिखाई गई है लेकिन, फिल्म में इसे केरल में मौजूद कोई इमैजिनरी चंद्रिका एलिफैन्ट सेंचुरी बताया गया है जहां के हाथियों को शिकारियों से खतरा है. यहां पहुंचकर जब आप एक्शन के कई सीक्वेंसेज के बीच कहानी खोज-खोजकर गुमशुदा होने पर आ जाते हैं तो आपको मिलती है – जमानों पुरानी, एक घिसी-पिटी कहानी.

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लिखाई में बरती गई कोताही इससे भी पता चलती है कि कहानी इस कदर प्रेडिक्टेबल है कि किरदार के परदे पर आने के साथ आप न सिर्फ उसके मरने का अंदाजा लगा सकते हैं कि बल्कि यह भी बता देते हैं कि यह कैसे मरेगा. रही-सही कसर कुछ अनमने और कुछ बनावटी से संवाद पूरे कर देते हैं.

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पूरी फिल्म में भारतीयता का अभाव है. दक्षिण के सुदूर जंगल में मौजूद तमाम लोग फर्राटे से हिंदी-अंग्रेजी बोलते मिलते हैं. साथ ही ये एकदम लेटेस्ट फैशन के कपड़े पहनते हैं और ड्रोन और मोबाइल तो कुछ इस तरह इस्तेमाल करते हैं जैसे अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में लगवाए जाने वाले वाईफाई की टेस्टिंग यहीं पर चल रही हो. इसके अलावा यह भी समझना मुश्किल है कि केरल के जंगल में ओडीशा पुलिस की गाड़ियां क्या कर रही हैं.

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अब क्योंकि यह एक एक्शन फिल्म है और इसके नायक विद्युत जामवाल हैं, इसलिए विद्युत सरीखी चपलता से दिखाए कुछ लाजवाब एक्शन सीक्वेंस आपको देखने को मिलते हैं. हालांकि कई मौकों पर एक्शन भी जबरदस्ती ठूंसा हुआ लगता है लेकिन फिल्म में देखने लायक यही एकमात्र चीज है, इसलिए आपको इससे ज्यादा शिकायत नहीं होती है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अभिनय के नाम पर जामवाल अभी भी लट्ठ ही बरसाते हैं.

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फिल्म में सिर्फ सुंदरता बढ़ाने के लिए रखी गई दोनों कन्याएं, पूजा सावंत और आशा भट ठीक-ठाक काम करती हैं, लेकिन उन्हें देखकर यही लगता है कि वे गलत वक्त पर, गलत जगह पर हैं. अच्छे अभिनय की उम्मीद आप अतुल कुलकर्णी से करते हैं लेकिन वे भी ओवरएक्टिंग कर आपको निराश कर देते हैं. कुल मिलाकर, ‘जंगली’ एक बासी कहानी और आपस में अंजान किरदारों को मिलाकर रचा गया जबर्दस्ती का सिनेमा है.

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